October 29, 2020

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जी 20 सदस्य देशों ने सभी के लिए शिक्षा निरंतरता करने की प्रतिबद्धता दुहराई

नई दिल्ली:- जी 20 सदस्य देशों के शिक्षा मंत्रियों ने एक साथ मिल कर काम करने और शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों को साझा करने के प्रति संकल्प जाहिर किया है जिससे कि सदस्य देश संकट के समय में भी समवोशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित कर सकें और सभी के लिए जीवन पर्यंत अध्ययन अवसरों को बढ़ावा दे सकें। संकट के समय में शिक्षा की निरंतरता, बाल्यावस्था शिक्षा एवं शिक्षा में अंतरराष्ट्रीयकरण के तीन चिन्हित क्षेत्रों पर चर्चा करने एवं सदस्य देशों के अनुभवों को साझा करने के लिए जी 20 सदस्य देशों के शिक्षा मंत्रियों की कल वर्चुअल रूप से एक बैठक आयोजित हुई। कल की बैठक इन विषय वस्तुओं पर वर्तमान में जारी चर्चाओं की परिणति थी जिसका आयोजन कोविड 19 महामारी के कारण वर्चुअल तरीके से किया गया। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि ये विषय वस्तुएं प्राथमिकता क्षेत्र भी हैं जिन्हें सरकार आगे बढ़ाती रही है। इन विषय वस्तुओं पर भारत की प्रतिबद्धता नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी परिलक्षित हुई है जिसमें देश के शिक्षा परिदृश्य में रूपांतरकारी बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत उन प्रयासों को जारी रखेगा जिसे उसने अपनी शिक्षा प्रणाली में सुधार एवं बदलाव लाने और कोविड 19 महामारी द्वारा प्रस्तुत चुनौती को कम करने के लिए किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत शिक्षा के क्षेत्र में जी 20 सदस्य देशों के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा मंत्रियों ने बैठक के अंत में एक शासकीय सूचना को अंगीकार किया। संकट के समय में शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के संबंध में शासकीय सूचना दूरस्थ और मिश्रित शिक्षण एवं अध्ययन के महत्व को स्वीकार करती है और उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा को बढ़ाने, शिक्षकों के लिए व्यावसायिक विकास, डिजिटल अवसंरचना एवं कंटेंट, साइबर सुरक्षा जागरूकता, उपयुक्त शिक्षण पद्धतियां एवं सक्रिय अध्ययन के महत्व को रेखांकित करती है तथा स्वीकार करती है कि ये दृष्टिकोण आमने सामने के अध्ययन के पूरक हैं। अध्ययन परिणामों और दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए अनुसंधान डाटा के महत्व पर भी बल दिया है। आरंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीई) के महत्व पर शासकीय सूचना में सभी बच्चों, विशेष रूप से निर्बल वर्गों से संबंधित बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण ईसीई की पहुंच एवं सुगम्यता में सुधार लाने के महत्व पर भी जोर दिया गया है। इसमें गुणवत्तापूर्ण ईसीई की अहम भूमिका के बारे में परिवार एवं समुदाय की जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है जिसकी प्रदायगी प्रत्येक चरण में बच्चे की विकास संबंधी आवश्यकता के अनुरूप होती है। शासकीय सूचना में शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों को साझा करने एवं ऐसे प्रचलनों को स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीयकरण स्तरों पर, जैसा उपयुक्त हो, अंगीकारण के द्वारा शिक्षा में अंतरराष्ट्रीयकरण को प्रोत्साहित करने का संकल्प भी व्यक्त किया है। यह के-12 स्तर पर अंतरराष्ट्रीयकरण पर चर्चा को आगे बढ़ाने का भी समर्थन करता है। शासकीय सूचना में छात्रों के अंतःसंस्कृति संबंधी तथा वैश्विक क्षमताओं के विस्तारीकरण में तथा सभी के लिए समान अध्ययन अवसर एवं अनुभव उपलब्ध कराने में किसी देश में अंतरराष्ट्रीयकरण प्रचलनों के प्रभाव पर भी जोर दिया है।

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