October 20, 2020

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नई शिक्षा नीति का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुलकर किया विरोध

कहा-निजीकरण व व्यापारीकरण को बढ़ावा, समानता के मौलिक अधिकार पर आघात

रांची:- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर खुलकर विरोध किया। हेमंत सोरेन ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा मिलेगा और समानता के मौलिक अधिकार पर आघात होगा। उन्होंने कहा कि इस नीति से सहकारी संघवाद की भावना को चोट पहुंचा है, नई नीति को लागू करने के लिए बजट कहां से लाएंगे, यह स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इससे झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों को नुकसान होगा। मुख्यमंत्री सोमवार को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की उपस्थिति में राज्यपाल तथा शिक्षा मंत्रियों के उच्चतर शिक्षा के रूपांतर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका पर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से अपनी बात रख रहे थे।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा नीति पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि भारत एक विविधता से भरा देश है, यहाँ विभिन्न राज्यों की जरूरतें अलग-अलग हैं और जैसा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसे बनाने में सभी राज्यों के साथ खुले मन से चर्चा होनी चाहिए थी, जिससे कोई राज्य इसे अपने ऊपर थोपा हुआ नहीं माने । उन्होंने इस नीति को बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और परामर्श के अभाव की बात कही । हेमंत सोरेन ने कहा कि आज जब नीति बनकर तैयार हो गयी है तब केंद्र सरकार राज्यों के साथ इस पर चर्चा कर रही है , अच्छा होता कि इस पर पहले बात होती और सभी राज्य सक्रिय रूप से इसे बनाने में अपनी भागीदारी निभाते । सोरेन ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि विगत कुछ समय से कई सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण के निर्णय , वाणिज्यिक खनन और जीएसटी पर केंद्र सरकार के एकतरफ़ा निर्णय आदि के बाद अब नई शिक्षा नीति के नियमन में राज्यों से सलाह मशविरा का अभाव उन्हें सहकारी संघवाद की बुनियाद पर आघात प्रतीत होती है।

मुख्यमंत्री कहा कि शिक्षा नीति का प्रभाव हम अगले दशक में देख पाएंगे और लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सरकारें 5 साल के लिए चुनी जाती है, ऐसे में भी इसे सही ढंग से लागू करने के लिए भारत सरकार को सभी राज्य सरकारों एवं राजनितिक दलों से चर्चा करनी चाहिए थी, जो वे नहीं कर पाए । हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार निजी और विदेशी संस्थानों को आमंत्रित कर रहे हैं परन्तु, आदिवासी, दलित, पिछड़े, किसान-मजदूर वर्ग के बच्चों के हितों की रक्षा के बारे में इस दस्तावेज में कुछ ठोस नहीं कहा गया है । क्या 70-80 प्रतिशत के बीच की जनसंख्या वाले इस बड़े वर्ग के बच्चे लाखों-करोड़ों की फीस दे पाएंगे ? उन्होंने कहा कि लाखों-करोड़ों की फीस वसूलने वाले निजी विश्व विद्यालय जब आज के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसरों के सामने बड़े-बड़े सैलरी पैकेज का ऑफर रखेंगे तो राज्य सरकार अपने पुराने सरकारी संस्थानों के अच्छे प्रोफेसरों को कैसे रोक पाएंगे ? और इससे हानि किस वर्ग के बच्चे-बच्चियों को होगी ? प्रधानमंत्री से मुखातिब होते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि वे और उनकी ार्टी ने ने 2010-11 में निजी सस्थानों को बढ़ावा देने सम्बन्धी निर्णय का कड़ा विरोध किया था जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसे अन्य दलों का समर्थन भी मिला था । तो किन परिस्थितियों में आज नई शिक्षा नीति में विदेशी निजी शिक्षण केन्द्रों को बढ़ावा देने का मन बना लिया गया ? उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति के साथ-साथ रोजगार सम्बंधित नीति पर भी इसमें चर्चा होनी चाहिए थी । दोनों लगभग साथ-साथ चलती हैं। परन्तु, वह यहाँ दिख नहीं रहा है । सोरेन ने कहा कि स्कूल में ज्यादा वर्ष गुजारने से अगर बच्चे को रोजगार सम्बंधित फायदा नहीं दिखेगा तो हम चाहें कितनी भी अच्छी शिक्षा नीति बना लें वह सफल नहीं होगी । उन्होंने कहा कि नई नीति को लागू करने में खर्च होने वाली धन राशि कहाँ से आएगी ? झारखण्ड की बात रखते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा में उन्नति को लेकर 2020-21 में राज्य के कुल बजट का 15.6प्रतिशत शिक्षा को समर्पित किया है जो कि पिछले वर्ष से 2 प्रतिशत ज्यादा है। नई नीति में कहा गया है कि जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होगा। परन्तु, इसके क्रियान्वयन के चलते राज्यों के कंधों पर अतिरिक्त कितना बोझ आएगा उस पर कुछ बात नहीं की गयी है । हेमंत सोरेन ने कहा कि नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओँ को शिक्षा के माध्यम के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गयी है। परन्तु, खेद है कि ऐसा करते वक़्त सिर्फ आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओँ का ही जिक्र किया जा रहा है। झारखंड में हो, मुंडारी , उरॉव (कुडुख) जैसी कम-से-कम 5 अन्य भाषाएँ हैं जिन्हें आठवीं अनुसूची में जगह नहीं मिल पाई है, मगर इनके बोलने वालों की संख्या 10-20 लाख है। इस मौके पर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का और शिक्षा सचिव राहुल शर्मा उपस्थित थे ।

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