October 21, 2020

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पाक सेना और आईएसआई ने भारतीय और अमेरिकी सेना से संघर्ष में आतंकी संगठनों का लिया सहारा : एहसान

इस्लामाबाद:- पूर्व तालिबान कमांडर एहसानुल्लाह एहसान इस साल फरवरी में पाकिस्तान की सेना के सेफहाउस से फरार हो गया था। उसने बताया है कि कैसे पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने भारत और अमेरिका की सेना को निशाना बनाने के लिए कई आतंकी संगठनों का सहारा लिया था। एहसान ने बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने तालिबान से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की तरफ से कश्मीर में भारत के खिलाफ संघर्ष करने की अपील की थी। एहसानुल्लाह को सन 2012 में मलाला यूसुफजई पर हमले और 2014 में पेशावर में सैन्य स्कूल में जानलेवा हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। उसने बताया सन 2011 में उत्तर वजीरिस्तान के मीरानशाह बाजार में एहसान के वॉकी-टॉकी पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सीनियर नेता मौलाना वली-उर-रहमान महसूद के सेक्रटरी की कॉल आई। उन्होंने एहसान से मिलने पर जोर दिया और फिर आधे घंटे में वहां आ पहुंचे।
उन्होंने बताया कि वली मिलना चाहते है। सेक्रटरी ने यह भी बताया कि एहसान से मिलने के लिए अमीर हकीमुल्लाह महसूद भी आने वाले हैं। मिलने के लिए जो जगह तय की गई थी वहां पहुंचने से 5 मिनट पहले एहसान के पास हकीमुल्लाह के दाएं हाथ लतीफ महसूद का फोन आया और बताया गया कि सुरक्षा कारणों से मिलने की जगह बदल दी गई है।
जब मीटिंग हुई तो एहसान को डीजी आईएसआई जनरल शूजा पाशा का वली-उर-रहमान को लिखा खत दिखाया गया। इसमें शूजा ने टीटीपी नेतृत्व को ऑफर दिया था कि अगर टीटीपी पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष को खत्म कर देगा तो न सिर्फ आईएसआई उन्हें अफगानिस्तान में नाटो बलों से बचने में मदद करेगा बल्कि वित्तीय और सैन्य सपॉर्ट भी देगा। शूजा ने टीटीपी की क्षमता और ताकत की तारीफ भी की और उसे पाकिस्तान के लिए बेहद अहम बताया।

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