October 24, 2020

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बेरमो व दुमका विधानसभा उपचुनाव को लेकर सरमर्गी बढ़ी

बेरमो में अनूप सिंह कांग्रेस व दुमका में वसंत सोरेन का जेएमएम प्रत्याशी होना लगभग तय, उधेड़बुन में है बीजेपी

रांची:- भारत निर्वाचन आयोग की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि दुमका और बेरमो विधानसभा उपचुनाव नंवबर में करा लिया जाएगा, इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गयी है। दो सीटों के लिए होनेवाले उपचुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) व कांग्रेस द्वारा एक-एक सीट पर प्रत्याशी दिया जायेगा और दोनों दलों के प्रत्याशियों के नाम लगभग तय है। बेरमो विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस द्वारा प्रत्याशी दिया जायेगा एवं कांग्रेस पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह के बड़े पुत्र जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह को ही पार्टी प्रत्याशी बनायेगी, यह लगभग तय है। वहीं जेएमएम की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ़भाई वसंत सोरेन को उतारा जायेगा। दोनो दलों की उपचुनाव को लेकर पूरी तैयारी है। इधर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उपचुनाव में प्रत्याशी देने को लेकर उधेड़बुन में है। बीजेपी जहां दुमका विधानसभा क्षेत्र में बाबूलाल मरांडी को उपचुनाव लड़ाने को लेकर असमंजस की स्थिति में है। वहीं बेरमो विधानसभा क्षेत्र के लिए भाजपा अपने पार्टी प्रत्याशी और सहयोगी आजसू पार्टी को लेकर पशोपेश में है। वैसे दुमका में बीजेपी द्वारा पूर्व मंत्री डाॅ लुईस मरांडी को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है। परन्तु बेरमो विधानसभा उपचुनाव को लेकर बीजेपी संकट में है। बेरमो में कांग्रेस के पक्ष में स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह की सहानुभूति वोट है और बीजेपी प्रत्याशी चयन को लेकर किसी पर भरोसा नहीं कर पा रही है। वैसे बेरमो के लिए पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल, गिरिडीह के पूर्व सांसद रवींद्र पाण्डेय और बीसीसीएल के नवनियुक्त सीएमडी गोपाल सिंह के पुत्र मृगांक शेखर ने बीजेपी टिकट के लिए सश्क्त दावेदारी पेश की है। लेकिन बताया गया है कि बीजेपी राज्य में विधायकों की संख्या बढ़ाने को लेकर काफी सोच समझ कर फैसला करेगी। बीजेपी उपचुनाव में हर हाल में सहयोगी आजसू पार्टी का समर्थन हासिल करना चाहेगी और आजसू पार्टी के जिद पर अड़ने की स्थिति में बेरमो सीट आजसू के खाते में भी जा सकती है। जेएमएम के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भटटाचार्य ने चुनौती दी है कि बीजेपी दुमका से बाबूलाल मरांडी को प्रत्याशी बनाए। वहीं उन्होंने दावा किया कि दुमका विधानसभा सीट जेएमएम की पारम्परिक सीट है और उपचुनाव को लेकर पार्टी की पूरी तैयारी है। पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा के डाॅ लुईस मरांडी को 13188 मतों से मात दी थी। मुख्यमंत्री सोरेन ने उस चुनाव में 81007 वोट एवं लुईस मरांडी ने 67819 वोट हासिल किया था। लिहाजा मुख्यमंत्री ने बाद में दुमका सीट छोड़ दी और दूसरी बरहेट सीट अपने पास रख ली है।
बेरमो में आजसू पार्टी के दावा से बीजेपी पसोपेश में
बेरमो विधानसभा उपचुनाव को लेकर आजसू पार्टी ने बीजेपी को परेशानी में डाल दिया है। बताया गया है कि इस सीट पर उपचुनाव लड़ने को लेकर भाजपा की परम्परागत सहयोगी रहे आजसू द्वारा सशक्त दावेदारी पेश किया गया है। भाजपा के दो बार विधायक रह चुके प्रत्याशी योगेश्वर महतो 63773 मत हासिल करके इस सीट से पराजित हुए थे और कांग्रेस के राजेन्द्र सिंह ने 88945 मतों के साथ जीत दर्ज की थी। जबकि आजसू पार्टी के प्रत्याशी काशीनाथ सिंह ने महज 16546 मत हासिल किया था। परन्तु आजसू पार्टी का तर्क है कि राज्यसभा चुनावों में बीजेपी द्वारा बार-बार आजसू का सहयोग लिया जाता रहा है और हाल ही में सम्पन्न राज्यसभा चुनाव में भी आजसू के समर्थन की वजह से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की। जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सत्तापक्ष के राज्यसभा प्रत्याशी के लिए समर्थन मांगने स्वयं आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश कुमार महतो के पास गए थे। लेकिन आजसू पार्टी ने बिना किसी बारगेनिंग किए भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। वहीं बीजेपी बेरमो सीट पर आजसू पार्टी के दावे को लेकर इसलिए भी असंमंजस की स्थिति में फंस चुकी है, क्योंकि भाजपा को मलाल है कि पिछले विधानसभा चुनाव में आजसू पार्टी के साथ गठबंधन नहीं होने के कारण ही पार्टी को करारी शिकस्त मिली है और सत्ता गंवानी पड़ी। भाजपा को लगता है कि अब उपचुनाव में फिर आजसू अकेले चुनाव लड़कर कम से कम बेरमो सीट पर पार्टी की कब्र न खोद दे। विधानसभा चुनाव में संभवतः बेरमो सीट भी आजसू की वजह से ही गंवानी पड़ी थी। लिहाजा बेरमो विधानसभा सीट के मतदाताओं में कोयला मजदूर मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते रहे हैं। वहीं इस सीट पर आजसू प्रमुख सुदेश महतो के स्वजातीय मतदाताओं की तादाद भी अच्छी खासी है। जहां तक कोयला मजदूर का सवाल है, तो यहां के मजदूरों में स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह के अलावा भाजपा के योगेश्वर महतो बाटुल सुदेश के स्वजातीय नहीं का भी प्रभाव है। वहीं आजसू के काशीनाथ सिंह भी मजदूर नेता हैं।

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