October 26, 2020

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क्या किशनगंज से ही तय होगा  बिहार की नई सरकार

किशनगंज:- बिहार विधानसभा चुनाव के घोषणा पूर्व ही किशनगंज जिला में राजनीति पार्टियों की हलचल तेज हो चुकी है और यही जिला शायद बिहार में नई सरकार किसकी होगी तय करेगी। इस जिले के चार विधानसभा सीटों में से विस संख्या-52 – बाहदुरगंज में कांग्रेस पार्टी का कब्जा है ,53-ठाकुरगंज एवं 55 कोचाधामन दोनों पर जनता दल यूनाइटेड का कब्जा है। वही इंडिया मजलिस इंतेहादूल मुस्लीमीन यानि औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम विधायक का कब्जा 54 किशनगंज में वर्ष 2019 में विधानसभा उपचुनाव के बाद से कब्जा कर पहली बार बिहार में दस्तक दे चुके है । यही कारण है कि एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल इमान ने मुस्लिम बाहुल मतदाताओं के बदौलत मुस्लिम मतदाता जहां भी मजबूत स्थिति में है उन सभी सीटों में से कुल पचास सीटों का चयन कर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस पार्टी को भी अपने भूल का एहसास है और इसीलिए विस संख्या -54 को अपनी परम्परा गत सीट पर खोई जमीन को वापस पाने के लिए कोई कोर -कसर नही छौड़ने वाली है। अगर औवेसी की पार्टी यहां के चारों विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करेगी और मजबूत स्थिति में होंगे तो सभी पार्टियों के द्वारा भाजपा समर्थकों के उपर ही नजर टिकने वाली है क्योंकि यही मतदाता उन पार्टियों के जीत के लिए निर्णायक भुमिका में होंगे। दुसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दल के नेता भी इस अवसर को अपने हाथ से न जाने की तैयारी में जरूर होंगे । लेकिन यह सारी गतिविधियाँ प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व को भी पता होंगे कि यहां की सियासत कभी पार्टी चुनाव नही लड़ती है यहां की जनता ही पार्टियों के मजबूत प्रत्याशियों पर ही सदा निर्भर रही है और यहीं कारण है कि किशनगंज विधानसभा सीट संख्या-54 पर भाजपा मतदाता मजबूत स्थिति में होकर भी बार -बार चुनावी मैदान में जंग हारती रही हैं। लेकिन भाजपा के भी प्रदेश नेतृत्व के ऐलान से यह स्पष्ट हो चुकी है वह अपने परम्परा गत सीटों से समझौता नही करने वाली है । इसीलिए यह मानना भी गलत नहीं होगा कि किशनगंज सीट फिर एक बार बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय चुनाव के दौरान रहने वाले है। यही सीट बिहार में सरकार भी बनाने में अहम भूमिका में होंगे।लेकिन यह चर्चा अटकलों के चुनावी बाजार पर आधारित है और यहां की राजनीतिक हलचल भी तेज है। लेकिन यह तो बिहार के दोनों गढबंधन एनडीए एवं महागठबंधन में पार्टियों के सीटों पर भागीदारी पर ही नई सरकार की दशा और दिशा तय करेंगे। लेकिन औवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के ऐलान के बाद अटकलों से चुनावी हलचल को राज्य में तेजी जरूर मिली है।

संवाददाता सुबोध

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