October 29, 2020

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शिक्षक दिवस पर झारखंड के तीन शिक्षकों को राष्ट्रपति ने किया ऑनलाइन सम्मानित

जमशेदपुर की शिक्षक इशिता डे, सिमडेगा के स्मिथ कुमार सोनी और बोकारो की डॉ. निरुपमा कुमारी सम्मानित

रांची:- शिक्षक दिवस पांच सितंबर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली से ही शिक्षकों को ऑनलाइन सम्मानित किया। इस मौके पर झारखंड के भी तीन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया, इनमें जमशेदपुर तारापुर स्कूल की उप प्रधानाचार्य इशिता डे, सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत शिक्षक स्मिथ कुमार सोनी और बोकारो के राम रूद्र प्लस टू उच्च विद्यालय, चास की शिक्षिका डॉ. निरुपमा कुमारी शामिल है। इन तीनों शिक्षकों को अपने-अपने जिला मुख्यालयों में उपायुक्त ने राष्ट्रपति की ओर से सिल्वर मेडल, प्रशस्ति पत्र और चेक देकर सम्मानित किया। इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से पुरस्कार के रूप में दी जाने वाली सामग्री और राशि भेजी गयी थी। जमशेदपुर स्थित तारापुर स्कूल की उप प्रधानाचार्य इशिता डे राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होने के लिए सभी के प्रति आभर जताया और कहा कि सभी के सहयोग से ही यह सम्मान मिल पायी है। सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत शिक्षक स्मिथ कुमार सोनी को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मूल रूप से गुमला जिले के बसिया निवासी सुमित कुमार सोनी ने अंबाटोली ,कोलेबिरा स्कूल में 1994 से शिक्षण की शुरुआत की थी। सिमडेगा जिला अंतर्गत बानो जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने के लिए शिक्षक स्मिथ कुमार सोनी ने समर्पण और सक्रियता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों को शामिल कर उन्होंने अधिक से अधिक बच्चों के शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास किया है और जिसके उत्साहवर्द्धक परिणाम भी सामने आए हैं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित बोकारो के राम रूद्र प्लस टू उच्च विद्यालय, चास की शिक्षिका डॉ. निरुपमा कुमारी का मानना है कि एक शिक्षक की सफलता उसके विद्यार्थियों के सफलता पर निर्भर है. शिक्षक को प्रत्येक दिन कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है. प्रत्येक विद्यार्थी की बौद्धिक क्षमता अलग-अलग होती है. सभी को समान रूप से शिक्षित करने के लिए शिक्षक को अपने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता का आकलन करना जरूरी है। डॉ निरुपमा ने बताया कि बच्चों को उनकी रुचि के मुताबिक शिक्षा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षक को निरंतर अध्ययन और आवश्यकता अनुसार नवाचार करने की जरूरत है। डॉ निरुपमा ने बताया कि शिक्षा के लिए भाषा का विकास आवश्यक है।कोई भी विद्यार्थी अपनी भाषा की क्षमता से ही किसी विषय में पारंगत हो सकता है। उन्होंने बच्चों में भाषा के विकास के लिए समय-समय पर प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया।

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