October 20, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

टाना भगत का आंदोलन तीसरे दिन भी आंदोलन जारी

टोरी में ट्रैक जाम के कारण कई मालगाड़ियां फंसी

रांची:- बापू के अनुयायी टाना भगत भूमि पट्टा, पेंशन और छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट में मिले अधिकारों को लागू करने की मांग को लेकर आंदोलित है। आंदोलनरत टाना भगतों ने बुधवार शाम पांच बजे से ही टोरी रेलवे स्टेशन में रेल पटरी पर धरना पर बैठे है और उनका प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी है।
टाना भगतों के आंदोलन के कारण धनबाद-बरवाडीह रेलखंड के अप और डाउन मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन बाधित है। कोरोना काल के कारण यात्री ट्रेनों का परिचालन को फिलहाल बंद है, लेकिन संक्रमण काल में नई दिल्ली से रांची के लिए चलायी जा रही विशेष ट्रेन समेत दर्जनों मालगाड़ियों का परिचालन बाधित रहा। नई दिल्ली से रांची आ रही राजधानी स्पेशल ट्रेन को प्रदर्शन के कारण करीब नौ घंटे तक डालटनगंज स्टेशन पर रोके रखा गया,इस दौरान करीब 750 यात्रियों को बस के माध्यम से रांची भेजा गया, लेकिन अन्यया नामक लाॅ की छात्रा ने रास्ते में ही ट्रेन से उतरने से इनकार कर दिया और गंतव्य स्टेशन तक पहुंचाने की मांग पर अड़ी रही, जिसके बाद उसे महिला पुलिस और आरपीएफ की सुरक्षा में करीब नौ घंटे बाद रेल मार्ग बदल कर रांची रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया, जहां स्कूटी से आये उनके पिता ने रिसीव किया। वहीं टोरी में ट्रैक जाम के कारण कई मालगाड़ियां तीन दिनों से फंसी हुई है, जबकि कई मालगाड़ियों और यात्री स्पेशल ट्रेन को दूसरे मार्ग से रवाना किया जा रहा है।
इधर, तीसरे दिन भी टाना भगत समुदाय का आंदोलन जारी है और विभिन्न जिलों से टाना भगत समुदाय के लोग धरना प्रदर्शन स्थल पर पहंुंच रहे है। गांधीवादी तरीके से किये जा रहे आंदोलन के दौरान सैकड़ों की संख्या में टाना भगत समुदाय के लोगों ने रेल पटरी को अपना विस्तार बना लिया है और मौके पर खाना बनाया जा रहा है। बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों से आंदोलनकारियों के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से प्रशासन की मुश्किल बढ़ती जा रही है। गुरुवार रात को भी जिले के उपायुक्त के अलावा स्थानीय विधायक बैद्यनाथ राम ने भी मौके पर पहुंचे और टाना भगतों से आंदोलन वापस लेने की मांग की। लेकिन टाना भगत समुदाय के नेताओं का कहना है कि जब तक उन्हें राज्यपाल की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता है, तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
दूसरी तरफ शुक्रवार सुबह को भी लातेहार, चतरा, गुमला, लोहरदगा, पलामू, सिंहभूम और रांची समेत विभिन्न जिलों से टाना भगत आंदोलन के समर्थन में मौके पर पहुंचे। इनका कहना है कि वे अपनी जमीन को लगान मुक्त करने की मांग कर रहे है। अंग्रेजी शासन के खिलाफ इन्हीं मुद्दों को लेकर आंदोलन चलाने वाले टाना भगत आजादी के 73 वर्ष बीतने के बावजूद अपने हक और अधिकार के लिए जूझ रहे है। उन्होंने बताया कि अपनी मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया था, जिस कारण यह रास्ता अपनाना पड़ा।

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