October 30, 2020

अनावरण न्यूज़

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आईटीआई में प्राचार्य व अनुदेशकों की नियुक्ति में विलंब पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की

श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग को दो सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का दिया निर्देश

रांची:- झारखंड उच्च न्यायालय में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, आईटीआई में प्राचार्य और अनुदेशकों के रिक्त पद और अन्य आधारभूत सुविधा की कमी को दूर करने को लेकर डाॅ. भीम प्रभाकर की ओर से दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि रंजन और न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग को फटकार लगाते हुवे कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्राचार्य व अनुदेशकों की नियुक्ति प्रशिक्षण महानिदेशालय भारत सरकार (डीजीटी) के आदेश अनुसार विभाग अबतक क्या कार्रवाई की है?
खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि झारखंड सरकार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चलाने में असमर्थ है। केवल संस्थान बनवा करके पब्लिक के पैसे का दुरुपयोग ना करें,उसे सुचारू रूप से संचालन करने के लिए प्रशिक्षित अनुदेशकों की नियुक्ति करें। ताकि सही तरीके से प्रशिक्षण संचालन हो सके।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह जानकारी दी गयी है कि झारखंड सरकार के द्वारा 59 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चल रही है जिसमें मात्र चार प्राचार्य हैं जबकि अनुदेशकों की भारी कमी के कारण स्थिति बहुत दयनीय हो गई है। न्यायालय ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का सुचारू रूप से देखरेख से संबंधित प्रति शपथ पत्र विभाग के सचिव का जवाब 2 सप्ताह के अंदर मांगा गया है।
याचिका कर्ता के वकील विनोद सिंह ने बहस के दौरान कहा कि आईटीआई बिना कोई योजना के खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अनुदेशकों की बहाली क्ळज् के द्वारा जारी मापदंडों के अनुसार किया जाय।

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