October 26, 2020

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LAC पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है चीन, भारतीय सेना भी ड्रेगन की सभी चालों को नाकाम करने को पूरी तरह तैयार

नई दिल्ली:- चीन की हरकतों के चलते वास्तविक नियंत्रण रेखा पर टकराव घटने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले चार दिनों के दौरान हुई ब्रिगेडियर स्तर की मैराथन बैठकों के भी बेनतीजा रहने की खबर है। इसके चलते भारतीय सेना ने भी अपना रुख आक्रामक रखने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक चीन ने पैंगोंग इलाके में पीछे हटने को लेकर भारत के समक्ष पहले ही कई शर्ते रख दी थी। लेकिन मौजूदा स्थिति में उसकी तरफ से यथास्थिति बहाली की मांग भारत से की जाने लगी है। दरअसल, भारत ने महत्वपूर्ण चोटियों पर पोजीशन ले रखी है जिससे चीन और भी बौखलाया हुआ है। वह चाहता है कि भारत अपनी पोजीशन बदले।
सूत्रों के मुताबिक, चीन को लेकर अब आने वाले दिनों में रुख आक्रामक रहेगा। अभी तक सिर्फ अपने बचाव की मुद्रा में सेना रहती थी। लेकिन बदली परिस्थितियों में सेना के रुख में बदलाव आया है। माना जा रहा है कि एलएसी पर लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत ने किसी भी हालात से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसलिए अब सेना की रणनीति इस बात पर होगी कि वह एलएससी पर मई से पहले की स्थिति बहाल करे।
वहीं, चीन से चल रही तनातनी के बीच 57वीं वाहनी एसएसबी ने मेलाघाट चौकी से लगती भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल ऑर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से गश्त की। उच्च स्तर पर मिले निर्देशों के बाद नेपाल एपीएस को साथ लेकर करीब तीन किलोमीटर तक पेट्रोलिंग की गई। इसी बीच भारत ने लद्दाख में पैंगोंग के उत्तरी किनारे की फिंगर 4 को फिर अपने कब्जे में ले लिया है। इस तरह 4 महीने बाद यह इलाका भारतीय सेना के कब्जे में पूरी तरह से आ गया है। अब यहां से सबसे निकट चीन की पोस्ट फिंगर 4 के पूर्वी हिस्से में हैं, जो भारतीय सेना की चौकी से कुछ मीटर की दूरी पर है। पैन्गोंग झील के उत्तरी किनारे पर विवाद की मुख्य जड़ फिंगर-4 की रिजलाइन पर भी भारतीय सेना ने चीनी प्रयासों को विफल करते हुए बेहतर सामरिक स्थिति बना ली है। पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर चीनी सैनिकों ने मई के शुरुआती दिनों में भारतीय क्षेत्र में आने वाली फिंगर-4 से 8 तक पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। मौजूदा तनाव से पहले चीन का फिंगर-8 में एक स्थायी कैम्प था और भारत मई से पहले फिंगर-8 तक पेट्रोलिंग करता था। इसे ऐसे समझना आसान होगा कि फिंगर-4 और फिंगर-8 के बीच आठ किमी. की दूरी है। इस तरह देखा जाए तो चीन ने आठ किलोमीटर आगे बढ़कर फिंगर-4 पर कब्जा करके पैंगोंग झील के किनारे आधार शिविर, पिलबॉक्स, बंकर और अन्य बुनियादी ढांंचों का निर्माण कर लिया।
इतना ही नहीं यहां पर चीन ने आर्टिलरी और टैंक रेजिमेंट्स को तैनात कर दिया। इसके बाद चीन के सैनिक भारतीय गश्ती दल को फिंगर-4 से आगे नहीं जाने देते थे। पूर्वी लद्दाख में पैगोंग झील इलाके में एलएसी पर दोनों पक्षों में तनाव बढ़ने की शुरुआत यहीं से हुई थी।

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