October 24, 2020

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कोयला चुनकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले बच्चों की शिक्षा की एक शिक्षक ने उठायी जिम्मेवारी

डिनोबिली स्कूल के टीचर पिनाकी राय के जज्बे को देखकर विदेशी संस्था सहयोग के लिए आगे आयी

धनबाद:- साल 2019 में पटना के गणितज्ञ आनन्द कुमार पर बनी फिल्म सुपर 30.फ़िल्म में कलाकार ऋतिक रौशन आनन्द कुमार की बखूबी भूमिका निभाई है। बड़े बड़े कोचिंग संस्थानों के ऑफर ठुकरा गरीब तबके के बच्चों को इंजीनियरिंग की क्लास करा कर उन्हें सफलता दिलाते हैं। झरिया के पिनाकी राय की कहानी भी कुछ इसी फिल्म के इर्द गिर्द घूमती नजर आती है। डिनोबिली स्कूल के टीचर पिनाकी राय कोयला चुनकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले बच्चों को शिक्षा देते हैं। पिछले कई सालों से उन बच्चों को शिक्षित करने का काम पिनाकी राय कर रहें हैं।विदेशी संस्था भी उनके इस नेक कार्य मे हांथ बंटा रही है। झरिया कोयलांचल में में कोयले की बड़ी बड़ी खदानें स्थापित है। एक बड़ी आबादी खदानों से निकलने वाली कोयले को चुनकर बेचती है। जिससे इनका जीवन यापन चलता है। बड़े से लेकर बच्चे तक यहां कोयला चुनने का काम करते हैं। बच्चे कोयला चुनकर बेचते हैं। जिससे इनका तथा इनके परिवार का भरण पोषण होता है। ऐसा नही है कि बच्चे पढ़ लिखकर कुछ अच्छा नही करना चाहते हैं। उनके अंदर भी करने की इच्छा है। लेकिन उनके माथे पर लिखी कोयला चोर उन्हें आगे बढ़ने नही देती।डिनोबिली स्कूल में बतौर टीचर पिनाकी राय को इनकी व्यथा देखी नही गई और उन्होंने साल 2015 में कोलफील्ड चिल्ड्रन क्लासेस की झरिया के हेटली बांध में स्थापना की।कोयला चुनने वाले बच्चे आज यहां शिक्षा ग्रहण करते हैं। धीरे धीरे बच्चों का आना यहां शुरू हुआ और सैकड़ों बच्चे लाभान्वित हो रहें हैं। वर्तमान में तीन स्थानों पर यह क्लासेज कराई जा रही है। चिल्ड्रेन क्लास से जुड़े सात बच्चे मैट्रिक पास कर चुके हैं। पिनाकी राय का कहना है कि बीसीसीएल ऐसे बच्चों को कोयला चोर कहकर उन्हें डेमोरलाइज करने का काम करती है। उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक समस्या है। इसे दूसरे एंगल से देखने की जरूरत है। शिक्षा के माध्यम से ही इन बच्चों के भविष्य को बदल सकते हैं। उन्होंने बताया कि विदेशी संस्था भी उनके इस कार्य से प्रेरित होकर सहयोग कर रही है। जर्मन की एक संस्था के द्वारा आर्थिक सहयोग किया जा रहा है। कुछ भारतीय कंपनियां भी आगे आई है।पिनाकी राय चाहते हैं कि राज्य सरकार के साथ मिलकर इस कार्य को करें। कोल इंडिया को भी इसे सामाजिक समस्या के रूप में लेना चाहिए। चिल्ड्रेन क्लास कर रही शिवानी कहती है कि वह दस साल की उम्र से यहां आती है। पिनाकी सर उसे यहां लेकर आए थे। पिछले दस सालों से शिवानी लगातार क्लास कर रही है। पढ़ लिखकर शिवानी इंस्पेक्टर बनना चाहती है। लेकिन अब भी वह कोयला चुनकर बेचती है। क्योंकि कोई रोजगार नही है और शुरू से ही यह काम वह करते आ रही है। यहां पढ़ने वाले अन्य बच्चे भी कोयला चुनने के लगे दाग को मिटाकर कुछ अच्छा करने की तमन्ना ठान ली है। इन बच्चों की माताओं का कहना है कि बच्चे कोयला चुनकर लाते हैं। उसी से गुजर बसर चलता है।लेकिन हम भी चाहते हैं कि बच्चों को ऐसे काम से छुटकारा मिले और जीवन मे कुछ बेहतर कर सके।इसलिए चिल्ड्रेन क्लास भेजती हूँ। पिनाकी राय की तरह ही यदि कोल कंपनियां और यहां की सरकार पहल करें तो इन बच्चों के माथे पर लिखे कोयला चोर का दाग अवश्य ही धूल जाएगा।

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