October 22, 2020

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चिराग पर हमलावर हुए मांझी, अब RJD व कांग्रेस को भी LJP के अगले पैंतरे का इंतजार

पटना:- हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा के अध्‍यक्ष जीतनराम मांझी ने बिना शर्त जनता दल यूनाइटेड के साथ खड़े होते हुए बेबाकी से मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का पक्ष लिया है। इस क्रम में उन्‍होंने लोक जनशक्ति पार्टी अध्‍यक्ष चिराग पासवान को चेतावनी दी है कि वे नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं जाएं। अब इसपर एलजेपी की प्रतिक्रिया का सबको इंतजार है। चिराग पासवान अभी चुप हैं। वे संकेतों में नए संकल्प का अहसास करा रहे हैं। इससे राष्‍ट्रीय जनता दल व कांग्रेस की आस थोड़ी मजबूत हुई है। चिराग और मांझी के सियासी पैतरे से महागठबंधन के प्रमुख नेताओं को लग रहा है कि राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में कुछ विशेष हलचल होने वाली है। इसलिए घटक दलों के साथ सीट बंटवारे पर संभावित विमर्श को अंजाम तक पहुंचाने से पहले वेटिंग मोड में छोड़ दिया गया है।
माना जा रहा है कि महागठबंधन में घटक दलों के साथ बात तभी आगे बढ़ेगी, जब एलजेपी अपनी मंशा को पूरी तरह साफ कर देगी। ऐसे में सात सितंबर की तिथि का सबको इंतजार है, जब चिराग ने दिल्‍ली में एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक बुला रखी है। उसके बाद उनके राजनीतिक व्यवहार का भावार्थ सबके सामने आना है।

संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद स्थिति स्‍पष्‍ट करेगी एलजेपी

चुनाव की तैयारियों के लिए वक्त बहुत कम है। इसलिए इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि एलजेपी के संसदीय बोर्ड की बैठक में चिराग अपनी पार्टी का रुख पूरी तरह साफ कर देंगे। साथ ही ‘हम’ के जेडीयू के साथ एकतरफा खड़े हो जाने और एलजेपी पर तल्ख हमले का जवाब भी दे सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो एलजेपी की स्थिति, राजनीतिक प्रतिबद्धता और एनडीए के साथ दोस्ती-दुश्मनी के भाव पर पड़ी धुंध भी सात सितंबर को ही साफ हो जाएगी।
बिहार में सात सितंबर के बाद बढ़ेगी चुनावी सरगर्मी
अभी तक यह महज संयोग था कि बिहार में सात सितंबर के बाद चुनावी सरगर्मी बढ़ने वाली है। अब सबकी रणनीतिक जरूरत भी है। जेडीयू और कांग्रेस की अलग-अलग वर्चुअल रैलियां शुरू होने वाली हैं। बीजेपी में भी बड़े नेताओं के दौरे शुरू होने वाले हैं। सात सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष को आना है और अगले ही दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं बिहार के चुनाव प्रभारी बनाए गए देवेंद्र फड़वीस को भी आना है। हालांकि, कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल शुक्रवार को पटना पहुंच चुके हैं। उन्हें दो दिन रहना है। इस दौरान उनकी मित्र दलों से बात भी होगी, लेकिन सीट बंटवारे पर महागठबंधन में फाइनल बैठक तभी होगी, जब एलजेपी के रहस्य से पर्दा हटेगा।
चिराग कांग्रेस की पसंद, पर लालू भी टटोल रहे मन
चिराग पासवान वैसे तो पहली पसंद कांग्रेस के हैं। महागठबंधन के अन्य घटक दलों की तुलना में कांग्रेस को एलजेपी से ज्यादा फायदा दिख रहा है। शुरू में लालू प्रसाद यादव कांग्रेस के स्टैंड से सहमत नहीं थे। इसकी एक वजह यह भी थी कि लालू को भरोसा नहीं हो रहा था कि एनडीए में चिराग इतना आगे बढ़ पाएंगे, लेकिन हाल के दिनों में चिराग ने जो तेवर दिखाए हैं, उससे लालू को भी इस खेल में आनंद आने लगा है। वह भी चिराग को टटोलने में जुटे हैं। मानकर चल रहे हैं कि चिराग ने गठबंधन बदला तो ठीक, नहीं तो एनडीए में आखिरी वक्त तक उठापटक का असर तो तैयारियों पर पड़ना ही है। सीट बंटवारे पर राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और विकासशील इंसान पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी से बातचीत को भी इसी वजह से टरकाया जा रहा है।

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