October 29, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

सरकार की कुपोषण मुक्त भारत बनाने की तैयारी , शुरू हो रही है ये परियोजना

बेगूसराय:- प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी परियोजना कुपोषण मुक्त भारत निर्माण के लिए भारत सरकार ने पोषण प्राइम मिनिस्टर ओवरआर्किंग स्कीम फॉर हॉलिस्टिक नॉरिशमेंट कार्यक्रम प्रारंभ किया है। बेगूसराय जिले में इस पोषण अभियान के तहत एक से 30 सितम्बर तक पोषण माह चलाते हुए कई स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत अतिगंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल एवं प्रबंधन, स्तनपान को बढ़ावा, नवजात की देखभाल, सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, राष्ट्रीय कृमिमुक्ति कार्यक्रम, विटामिन-ए खुराक अभियान, आइएफए अनुपूरण, टीकाकारण एवं ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के आयोजनों को क्रियान्वित किया जाना है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को इस माह में होने वाली गतिविधियों की सूची भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये हैं।
आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निभाएंगी जिम्मेदारी-
पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होने वाली मृत्यु का 45 प्रतिशत अतिगंभीर कुपोषण के कारण होता है। अतिगंभीर कुपोषित बच्चों में सामान्य बच्चों की तुलना में नौ से 11 गुणा मृत्यु का खतरा अधिक होता है। पोषण माह के तहत अतिगंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान करनी है। आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उम्र की तुलना में बहुत कम वजन वाले बच्चों की सूची तैयार करेंगी। उन्हें बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुर्नवास केंद्र रेफर किया जायेगा।
जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराना होगा
पोषण माह के दौरान आशा गृह आधारित नवजात की देखभाल कार्यक्रम के तहत अपने संबंधित क्षेत्र में नवजात के घर का भ्रमण कर शिशु एवं माता की जांच तथा पोषण संबंधी सलाह देगी। साथ ही स्वास्थ्य कर्मी एवं आशा, संस्थानों और समुदाय स्तर पर सभी नवजातों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने का प्रयास किया जायेगा। प्रसव पूर्व जांच एवं टीकाकरण के लिए आई गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं को स्तनपान एवं पोषण संबंधी परामर्श दिया जायेगा। धात्री महिलाओं से शिशु को दो साल तक नियमित स्तनपान और छह माह के बाद अनूपूरक आहार के लाभ पर चर्चा करना है।
बीमारी के लक्षणों की पहचान कर किये जाएंगे रेफर-
सुस्त एवं बीमार दिखाई देने वाले बच्चे, स्तनपान नहीं करने वाले या भूख की कमी, दोनों पैरों में सूजन, सांस का तेज चलना, छाती का धंसना, लगातार उल्टी एवं दस्त होना, मिर्गी या चमकी आना, तेज बुखार, शरीर ठंडा पड़ना, खून की कमी, त्वचा पर घाव एवं उपरी बांह की गोलाई 11.5 सेंटीमीटर से कम आदि लक्षणों की जांच कर इन बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुर्नवास केंद्र रेफर करना है। अतिगंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों के अभिभावकों को नियमित आयरन और फॉलिक एसिड की गोली, छमाही विटामिन-ए सीरप एवं अल्बेंडाजोल टैबलेट की खुराक पर परामर्श भी दिया जाएगा।
जानकारी और मदद के साथ फॉलोअप भी करना है-
अभियान के तहत 16 सितम्बर से 29 सितम्बर तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम तथा विटामिन-ए खुराक अभियान चलाया जायेगा। आशा लाभार्थियों की सूची तैयार कर उन्हें आवश्यक खुराक देंगी। छह से 59 माह तथा पांच से दस वर्ष के बच्चों, किशोर, किशोरियों तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के रोकथाम के लिए आइएफए सिरप, आइएफए की गुलाबी, नीली एवं लाल गोली की उपलब्धता लाभार्थी तक सुनिश्चित कराना है। नियमित टीकाकरण के साथ कुपोषण, एनीमिया, स्वच्छता पर भी चर्चा होगी। इस दौरान सभी पोषण पुर्नवास केंद्र क्रियाशील रहेंगे और कोविड-19 प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अतिगंभीर कुपोषित बच्चों का गुणवत्तापूर्ण उपचार किया जाना है। उपचार के बाद डिस्चार्ज बच्चों की स्थिति का फोन के माध्यम से हाल भी लेना है।

Recent Posts

%d bloggers like this: