October 22, 2020

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एक नयी सुबह का

केंद्र से बकाये पर गलत बयानी कर रहा सत्ता पक्ष : भाजपा

अपनी नाकामियों को छीपाने केलिये तथ्यों से परे आधारहीन आरोप लगा रहा झामुमो

राँची:- GST के compensation में केंद्र सरकार के द्वारा सौतेला व्यवहार करने का आरोप पूरी तरह से निराधार है और ये सरकार में बैठे लोगों की जानकारी के अभाव की ओर इशारा करता है।

राज्य की आंतरिक टैक्स संग्रह व्यवस्था के पहले दुरूस्त करें राज्य सरकार

राज्यों को gst क्षति पूर्ति की परंपरा एक अंतरिम व्यवस्था जिसकी समय सीमा तय।उसके बाद राज्य को अपनी व्यवस्था बेहतर करनी होगी।

देश में जितने राज्य हैं केंद्र सरकार की ज़िम्मेदारी सभी राज्यों के लिए हैं और GST काउंसिल की बैठक में इन सभी विषयों पर विचार होता है। कोविड 19 के कारण उत्पन्न हुई ये परिस्थितियां असाधारण है और इसलिए इसकी चुनौतियां भी असाधारण है जिसे संघीय ढांचे के अनुरूप केंद्र और राज्य दोनों की सरकारों को मिलकर सामना करना है। देश में 2,35,000 करोड़ का जो Gst shortfall हुआ है उसमे 1,38,000 करोड़ राज्यों के राजस्व पर नुक़सान सिर्फ कोविड 19 के कारण हुआ है व 97,000 करोड ही Gst क्रियान्वयन के कारण हुआ है। लक्सरी पदार्थों व कई अन्य सामानों पर लगने वाले compensation cess की सीमा बढ़ाकर 2022 तक की जा रही है।

जहाँ तक GST के कारण राज्य को राजस्व हानि होने की बात है तो उसके लिए भी स्वतंत्र रूप से राज्य सरकारें मार्केट से लोन ले सकती है या रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया क special window से भी राज्य सरकारें लोन ले सकती है। संभव है कि केन्द्र सरकार इसकी गारंटी लेने का भी निर्णय ले। इसलिए जल्दबाज़ी में और हड़बड़ी में नकारात्मक सोच के साथ आरोप प्रत्यारोप लगाने से राज्य में राजस्व की वृद्धि नहीं होगी। यहाँ कि राज्य सरकार को चाहिए कि अपने आंतरिक संसाधनों के उपयोग की और टैक्स संग्रह की व्यवस्था को सुदृढ करके राज्य के राजस्व व्यवस्था को मज़बूत करें।

राज्य में आर्थिक गतिविधियां ठप हैं। उद्योगों का पलायन हो रहा है, नक्सली गतिविधियां चरम पर हैं, लचर क़ानून व्यव्सथा और बेरोज़गारी के नए रिकॉर्ड क़ायम हो रहे हैं और राज्य पक्का अपनी कमजोरी को केंद्र पर डालकर पल्ला झाड़ना चाह रही है। इससे राज्य सरकार को राजस्व का लाभ नहीं होगा।

राज्यों को केंद्र द्वारा GST के कारण होने वाले क्षति को compensate करने की जो व्यवस्था है वो संवैधानिक रूप से भी एक अंतरिम व्यवस्था है जो कुछ दिनों के बाद ख़त्म हो जाएगी. तब राज्यों को उसी तरह अपना हिस्सा मिलेगा जैसा उनका GST कोष में योगदान होगा। तब ये बहानेबाज़ी नहीं चलेगी। इसलिए राज्य सरकार अपना कर्तव्य ठीक तरीक़े से करे। भाजपा के सभी सांसद अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं और केंद्र सरकार बिलकुल सही तरीक़े से विषय पर नज़र बनाए हुए हैं और सही समय पर राज्य के राजस्व अधिकार के विषय पर सही निर्णय होगा और राज्य के साथ सौतेला व्यवहार जैसे आरोप सिर्फ़ ओछी राजनीति से प्रेरित है।

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