October 22, 2020

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भूसा से भी सस्ता बिक रहा है मक्का, खून के आंसू रो रहे हैं किसान

बेगूसराय:- कोरोना के संक्रमण ने हर किसी को तबाह कर दिया है। शहर से लेकर गांव तक की अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है। सरकार व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रयास कर रही है लेकिन ग्रामीण व्यवस्था पटरी पर आना तो दूर और बिगड़ती जा रही है। हालत यह हो गयी है कि पशु के चारा से भी सस्ता अनाज बिक रहा है। पशुओं का चारा के रूप में उपयोगी भूसा 12 से 13 सौ रुपए क्विंटल यानी 12-13 रुपए किलो बिक रहा है लेकिन किसानों का मक्का एक हजार रुपए क्विंटल भी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। यही मक्का पिछले वर्ष इसी समय में 25 सौ रुपए क्विंटल यानी 25 रुपए किलो बिक रहा था। लॉकडाउन के कारण माल ढुलाई की व्यवस्था न होने के कारण इस साल बड़े व्यापारी यहां से मक्का ले जाने के लिए नहीं आए हैं, ना ही कोई संपर्क कर रहे हैं। इसके कारण बिचौलिए, मुनाफाखोर और छोटे व्यापारी मक्का आठ से नौ सौ रुपए क्विंटल खरीद रहे हैं। मजबूरी में जरुरतमंद किसान रोते हुए सस्ते में फसल बेच रहे हैं। सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 1850 तय कर रखा है लेकिन बिहार सरकार मक्का खरीद की कोई व्यवस्था नहीं करती है। गेहूं और धान खरीदने के लिए पैक्सों को अधिकार दिया जाता है लेकिन मक्का की ओर किसी का ध्यान नहीं है। रबी मौसम में बेगूसराय में सबसे अधिक मक्का की खेती होती है और यहां का मक्का देश के विभिन्न औद्योगिक समूहों तक पहुंचता है। बेगूसराय के किसानों ने इस वर्ष रबी सीजन में 50 हजार एकड़ से अधिक में मक्का लगाया था। सैकड़ों किसानों की सोच थी मक्का बेच कर बेटी की शादी करेंगे, बच्चों का नामांकन बाहर के अच्छे कॉलेज में कराएंगे। कर्ज लेकर खेती की, खेत में मेहनत की तो फसल भी अच्छी हुई लेकिन उचित दाम नहीं मिलने से बेटी की शादी और बच्चों का अच्छे कॉलेज में नामांकन का सपना धराशायी हो गया है। किसानों को खेती में लगाया गया खर्च नहीं लौट रहा है, जिसके कारण किसानों में बेचैनी छा गई है। मक्का उत्पादक किसान भूषण महतो, रामबाबू सिंह एवं विनय सिंह आदि ने बताया कि हाल के वर्षों में मक्का की बढ़ती मांग के कारण किसानों का मक्का उत्पादन के प्रति रुझान बढ़ा। हम लोग का मक्का घर आते ही व्यापारी पहुंच जाते थे, पिछले साल 25 सौ रुपए क्विंटल तक बिका लेकिन इस वर्ष व्यापारी अभी तक नहीं आए, घर में रखने की जगह नहीं है। अपने मवेशी को भूसा 12 रुपए किलो खरीद कर खिला रहे हैं जबकि मक्का दस रुपए किलो भी लेने के लिए भी कोई तैयार नहीं है।मजबूरी में क्या करें, औने-पौने भाव में बेच रहे हैं। एक छोटे व्यापारी का कहना है कि पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं बंगाल तक की फैक्ट्री में मक्का जाता था। इस वर्ष रेलवे स्टेशन पर रैक नहीं लगने और ढुलाई की समस्या के कारण व्यापारी नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा है।

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