October 31, 2020

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लाह की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे किसान

रांची:- झारखंड में रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के किसान इन दिनों लाह की खेती कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यहां के किसानों का कहना है कि परंपरागत कृषि से हटकर व्यवसायिक खेती करने से आमदनी में कई गुना वृद्धि हो रही है। रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के कई किसान लाह की खेती से जुड़ रहे हैं। लाह की खेती से होने वाले मुनाफे को देखते हुए आने वाले दिनों में ओरमांझी प्रखंड में 300 एकड़ भूमि तक इसे बढ़ाने की योजना है। पिछले 2 सालों से लाह की खेती कर रहे जगनू उरांव को लाह की खेती करने में सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ मिला है। लाह की खेती से होने वाली कमाई से वह काफी खुश हैं। लाह की खेती में जगनू उरांव एवं अन्य किसानों के लिए भी पथ प्रदर्शक का काम करते हैं। कृषि के गुर सीखने के लिए रांची, खूंटी और सिमडेगा समेत कुछ अन्य जिलों के किसान इनसे हमेशा संपर्क में रहते हैं। लाह की खेती की बारीकियों को समझने के लिए जगनू उरांव के खेत पर पहुंचे रंजीत साहू और आमोस टोप्पो इस काम को फायदेमंद बताते हैं। इनका कहना है कि लाह की खेती से जुड़कर वह अपनी आय में काफी हद तक बढ़ोतरी कर सकते हैं। झारखंड के लाह की डिमांड देश में तो है ही, विदेशों में भी इसकी मांग काफी अधिक है। लाह का इस्तेमाल चूड़ी, पेंट, वार्निश और गोंद समेत कई अन्य सामग्रियों में किया जाता है विशेषज्ञों की मानें तो लाह को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक अच्छा माध्यम भी बताया जाता है।

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