October 22, 2020

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साहिबगंज जिप अध्यक्ष व अन्य के खिलाफ झूठा व गलत मुकदमा दर्ज हुआ-बाबूलाल

रांची:- बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि साहिबगंज जिला परिषद् अध्यक्षा रेणुका मुर्मू, उनके पति लालू भगत और नंदलाल साह सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ लॉकडाउन के उल्लंघन से संबंधित मामला दर्ज किया गया है, यह मुकदमा पूरी तरह झूठा व गलत है और राजनीति से प्रेरित है। सबसे आश्चर्यजनक बात पीड़िता ने जो उन्हें यह जानकारी दी है कि जिस शिवगादी मंदिर को घटनास्थल बताकर इन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, वह बरहेट थाना क्षेत्र के अधीन आता ही नहीं है। पुलिस द्वारा इन पर लॉकडाउन में कथित बाधा उत्पन्न करने का जिक्र कर गैर-जमानती धारा लगाकर मुकदमा कर स्पष्ट रूप से किसी को बेवजह परेशान करने का प्रयास प्रतीत हो रहा है। जिला परिषद् अध्यक्षा के पति शिवगादी प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष होने के नाते सावन के अंतिम दिन सोशल डिस्टेंसिंग का अक्षरशः पालन करते हुए साफ-सफाई करवा रहे थे, इसी को राजनीतिक रंग देकर झूठा मुकदमा किया गया है। इस मामले में कुछ अन्य और महत्वपूर्ण बिन्दु हैं जो इस मुकदमे और बरहेट पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्य सचिव को शनिवार को लिखे पत्र में बताया कि इस मामले में एक और आश्चर्यजनक एवं महत्वपूर्ण विषय यह है कि इस मामले में जिस तीसरे शख्स नंदलाल साह पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है, वह वही शख्स है जिसने 22 जुलाई, 2020 को बरहेट थाना के तत्कालीन थानेदार हरीश पाठक द्वारा थाना परिसर में ही एक महिला राखी कुमारी के साथ भद्दी-भद्दी गालियां एवं मारपीट करने का वीडियो बनाकर थानेदार की करतूत को उजागर करने का काम किया था।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एक तरफ उसी बरहेट थाना में एक महिला जब तत्कालीन थानेदार पर छेड़छाड़ से संबंधित आवेदन देती है तब थानेदार पर छेड़खानी से जुड़ी धारा न लगाकर महज जमानती धारा लगाकर दारोगा को जेल नहीं जाने की मुकम्मल व्यवस्था की जाती है। यही नहीं, दारोगा को उनके मनोकुल स्थान मुसाबनी स्थानांतरण कर उन्हें आराम फरमाने के लिए भेज दिया जाता है। दूसरी तरफ जिस व्यक्ति ने वीडियो बनाकर दारोगा हरीश पाठक के शर्मनाक और घिनौने कृत्य को उजागर किया, उसके साथ यह सलूक होना अनुचित है। नंदलाल को दारोगा के द्वारा महिला के साथ मारपीट वाले वीडियो सार्वजनिक करने के वक्त ही धमकी दी गई थी कि तुम्हें फंसा दिया जाएगा और अंततः उसे फंसा ही दिया गया। और तो और गैर-जमानती धारा लगाकर उसे परेशान किया जा रहा है। यह प्रक्ररण झारखंड पुलिस की कार्यर्शली और भ्रष्ट पुलिस को आईना दिखाने वाले आम नागरिक पर पुलिस द्वारा बदले की भावना से की गई कार्रवाई का एक बेहतरीन नमूना कहा जा सकता है।
बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा कि गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे पर दिनांक 28 अगस्त को देवघर पुलिस द्वारा किया गया मुकदमा भी अपने आप में विचित्र व अनूठा है। ट्विटर हैंडल पर लिखी बातों को आधार बनाकर पूर्वाग्रह व राजनीति से प्रेरित होकर झारखंड पुलिस ने एक और नया काला अध्याय शुरू करने का काम किया है। इस एफआईआर में किसी प्रकार का कोई ठोस साक्ष्य भी नहीं है। एक सम्मानित जनप्रतिनिधि पर इस प्रकार बिना किसी ठोस आधार के मुकदमा करना किसी बड़ी राजनीतिक षड़यंत्र का हिस्सा है।

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