September 23, 2020

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विनाशकारी तकनीक ने युद्ध के तरीकों को बदला: नरवणे

ऐसी तकनीक विकसित हो जिससे भविष्य में युद्ध लड़ने के लिए सेना का पुनर्गठन किया जा सके

मौजूदा हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों को अपग्रेड करने पर सेना प्रमुख ने दिया खासा जोर

नई दिल्ली:- सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने मंगलवार को कहा कि विनाशकारी तकनीक ने युद्ध को मौलिक रूप से बदल दिया है। इसलिए ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है जिससे भविष्य में युद्ध लड़ने के लिए सेना का पुनर्गठन किया जा सके। उन्होंने मौजूदा आधुनिकीकरण अभियान में मौजूदा हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों को अपग्रेड करने पर जोर दिए जाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने युद्ध के दौरान विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए भारतीय सशस्त्र बलों को इससे बचने की सलाह दी। सेना प्रमुख नरवणे आज आर्मी वॉर कॉलेज, महू में एक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। विनाशकारी प्रौद्योगिकी के प्रभावों के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी देने के लिए 24-25 अगस्त को आर्मी वॉर कॉलेज, महू में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर ‘भविष्य के संघर्षों में विनाशकारी प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर एक वेबिनार आयोजित की गई। कोविड-19 के कारण देश भर में सिर्फ 54 स्थानों पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जनरल नरवणे ने युद्ध में विघटनकारी तकनीक के परिणामों पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि वर्तमान आधुनिकीकरण अभियान मौजूदा हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों को अपडेट करने पर केंद्रित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य अनुप्रयोगों में उत्पादों की आवश्यकता और उन्हें एकीकृत करने के लिए आवश्यक राष्ट्रीय मिशन को सैन्य बलों के आधुनिकीकरण की रणनीति का हिस्सा बनना चाहिए। सेना प्रमुख ने अपने सफल संगठन के लिए आर्मी वॉर कॉलेज की सराहना की। दो दिवसीय इस वेबिनार में क्लाउड कम्प्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), ऑगमेंटेड रियलिटी/वर्चुअल रियलिटी, रोबोटिक्स, बिग डेटा एनालिटिक्स, साइबर, स्मॉल सेटेलाइट साइबर वारफेयर पर चर्चा हुई। इन सभी विभिन्न पहलुओं पर कीमती सुझाव दिए गए। संगोष्ठी के पैनलिस्ट विषय पर सैन्य विशेषज्ञों, तकनीशियनों, शिक्षाविदों और वक्ताओं ने संबंधित विषय पर विचार-विमर्श किया। वेबिनार की शुरुआत एआरटीआरएसी के जीओसी-इन-सी, लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला के भाषण के साथ शुरू हुई। इस वेबिनार ने भारतीय सेना के लिए राष्ट्रीय महत्व के सैद्धांतिक और रणनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया और जटिल अवधारणाओं को पेश करने में मदद की।

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