September 30, 2020

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पांडुपोल मेला आज, घरों में ज्योत देखकर श्रद्धालुओं ने लगाया चूरमे का भोग

अलवर:- हर साल भरने वाला जिले का प्रसिद्ध पांडुपोल मेला इस बार कोरोना संक्रमण के चलते नहीं भरा। मंगलवार को पांडुपोल मेले के उपलक्ष्य के जिला प्रशासन की ओर से एक दिवसीय अवकाश जिले में घोषित किया गया। ऐसे में श्रद्धालुओं द्वारा घर में ही हनुमान जी महाराज की ज्योत देखकर दाल बाटी चूरमे का भोग लगाया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में आते हैं। लेकिन इस बार कोरोनावायरस के चलते श्रद्धालुओं को पांडुपोल मंदिर जाने की अनुमति नहीं है। वरना हर बार पांडुपोल मेले के लिए पुलिस व प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम कियर जाते है।
रोडवेज़ द्वारा श्रद्धालुओ की सुविधा को देखते हुए कई अतिरिक्त बसों के साथ मेला स्पेशल बस लगाई जाती है। जो बस स्टैंड से पांडुपोल मंदिर तक श्रद्धालुओ को छोड़ती है। इस दौरान बहुत भीड़ रोडवेज़ में होती है। मेला रोडवेज़ के लिए वरदान साबित होता है क्योकि लाखों रुपए की कमाई रोडवेज़ की इस मेले से होती है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते जिला प्रशासन द्वारा पांडुपोल मंदिर को जाने वाले विभिन्न रास्तों का कई जगह बैरिकेट्स लगाकर श्रद्धालुओं को मंदिर नहीं आने की समझाइश कर वापस घर भेजा जा रहा है। ताकि कोरोना संक्रमण को रोका जा सके।
अलवर में हनुमान जी को कई नामों से जाना जाता है
अलवर में हनुमान जी के प्रति लोगों की बड़ी आस्था है। हर वर्ष हनुमान जयंती और पांडुपोल मेले के दौरान मंदिरों में विशेष सजावट व कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। यहां हनुमान जी के विभिन्न नमो से मंदिर है। जैसे बाला किला स्थित चक्रधारी हनुमान मंदिर, तोप वाले हनुमान जी, बगीची वाले हनुमान जी, आड़ा-पाड़ा वाले हनुमान जी, रामायनी हनुमान जी, बी ए पास हनुमान जी, चमत्कारी हनुमान मंदिर, कल्याणकारी हनुमान जी, अकबरपुर वाले हनुमान जी आदि नामों से मंदिरों को जाना जाता है।

पांडुपोल मंदिर की यह है मान्यता

सरिस्का की वादियों में स्थित पांडुपोल मंदिर का निर्माण करीब 5 हजार साल पहले संत नारायण दास ने कराया था। लोगों की ऐसी मान्यता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां रहे थे। भीम का घमंड चूर करने के लिए हनुमान जी रास्ते में वानर का रूप बनाकर लेट गए थे। भीम ने वानर से रास्ता देने को कहा। वानर ने भीम से कहा कि मेरी पूंछ उठाकर रास्ता बना लो। भीम ने पूरी ताकत लगा दी लेकिन पूंछ नहीं हिली। जब हनुमानजी असली रूप में प्रकट हुए। भीम ने उनसे क्षमा मांगी तभी से यह प्रतिमा शयन मुद्रा में है। इस मन जाता है तभी से इसका नाम पांडूपोल पड़ा।

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