November 24, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

झारखंड में 4.56 लाख प्रवासी कामगारों का डाटाबेस तैयार

खेती-बाड़ी ,पशुपालन व सखी मंडल से जोड़कर आजीविका उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार

राँची:- वैश्विक महामारी कोरोना वायरस कोविड-19 की वजह से लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण झारखंड के लाखों प्रवासी कामगार अपने घर वापस लौट चुके है। झारखंड सरकार की ओर से 4.56 लाख प्रवासी कामगारों का डाटाबेस तैयार किया गया और इन्हें खेती-बाड़ी, पशुपालन, सखी मंडल से जोड़कर आजीविका उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की है।
ग्रामीण विकास विभाग ने मिशन सक्षम मोबाइल एप्प के जरिए इन प्रवासियों के कौशल की पहचान, रुचि एवं अन्य जानकारी सर्वेक्षण के जरिए एकत्रित की है। मिशन सक्षम सर्वेक्षण के जरिए अब तक करीब 4.56 लाख प्रवासियों का डाटाबेस तैयार किया जा चुका है। जिसके मुताबिक कुल प्रवासियों का 37.2 फीसदी लोग खेती-बाड़ी में रुचि रखते है और कृषि आधारित आजीविका की शुरुआत करने को इच्छुक है, वहीं 13.8 फीसदी प्रवासियों ने पशुपालन को रोजगार का साधन बनाने की इच्छा जताई है।
ग्रामीण विकास विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने बताया कि वैसे प्रवासी जो कृषि, पशुपालन एवं अनुषंगी क्षेत्रों से जुड़कर स्वरोजगार करना चाहते है , उनको राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़ा जा रहा है ताकि फौरी तौर पर राहत मिल सके। इच्छुक प्रवासी महिलाओं को सखी मंडल में जोड़कर आजीविका के साधनों से जोड़ने की तैयारी है। इसी कड़ी में इच्छुक प्रवासियों को खेती की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है जिसके तहत उनको बीज उपलब्ध कराया जा चुका है ताकि ससमय उनके लिए एक आजीविका का साधन सुनिश्चत किया जा सके।
विभाग की ओर से यह जानकारी दी गयी है कि कोविड-19 आपदा की घड़ी में राज्य के विभिन्न इलाकों में सखी मंडल की दीदियां अपने परिवार के भरण पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। चतरा के प्रतापपुर प्रखण्ड के नारायणपुर का प्रवासी विजय भुइंया रांची में ऑटो ड्राइवर की नौकरी करते थे। लॉकडाउन के वजह से नौकरी गई तो पत्नी कविता देवी ने दुर्गा आजीविका सखी मंडल के जरिए क्रेडिट लिंकेज से लोन लेकर पति के ऑटो खरीदने का सपना पूरा किया। आज वह आत्मनिर्भर हैं और अपने घर में ऑटो चला रहे है। वहीं पाकुड़ की जानकी मंडल भी सखी मंडल से लोन लेकर सब्जी बेचने का कार्य कर रही है। कोलकाता से वापस लौटे प्रवासी सुनील मंडल भी इस काम को आगे बढ़ाने में जानकी की मदद कर रहे है और कमाई से अपना घर चला रहे है। कविता एवं जानकी जैसी हजारों महिलाएं आपदा की इस घड़ी में सखी मंडल के जरिए छोटे छोटे रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार का भरण पोषण तो कर ही रही है साथ ही अपने परिवार को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर भी ले जा रही है।

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