November 25, 2020

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विरोधी दल के नेताओं को सुरक्षा मुहैया कराने में बरता जा रहा है भेदभाव : बाबूलाल मरांडी

केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर मानकों के उल्लंघन मामले की जांच कराने की मांग

राँची:- झारखंड में बीजेपी विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि राज्य में लगातार बढ़ती उग्रवादी व आपराधिक गतिविधियों के बावजूद राज्य सरकार द्वारा विरोधी दलों या उनकी विचारधारा से जुड़ें लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने में भेदभाव बरता जा रहा है। बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मानकों के उल्लंघन मामले की जांच कराने का आग्रह किया गया है।
बीजेपी विधायक दल के नेता ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद से राज्य में नक्सल और आपराधिक मामले में बेतहाशा वृद्धि होना चिंता का विषय है। इसकी भयावहता इससे समझी जा सकती है कि वर्तमान सरकार के पहले छह माह के कार्यकाल में ही 42 से अधिक छोटी-बड़ी उग्रवादी घटनाएं घट चुकी हैं। अपराध तो चरम पर है ही। दूसरी तरफ राज्य सरकार कुछ प्रबुद्ध लोगों को (जिनकी जान पर संभावित खतरा है) सुरक्षा मुहैया कराने में भी राजनीतिक चश्मे का उपयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले तो राज्य के प्रभारी पुलिस महानिदेशक द्वारा वैश्विक महामारी कोरोना संकटकाल के प्रारंभिक दिनों में जनप्रतिनिधियों को छोड ऐसे तमाम लोगों की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को बल की कमी होने का हवाला देकर मुख्यालय वापस बुला लिया। लेकिन इसके ठीक अगले दिन से ही विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों द्वारा सत्तारूढ दलों से जुड़े न सिर्फ छोटे-से-छोटे नेताओं बल्कि चुनिंदा झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थक ठेकेदारों, बिचैलियों, सत्ता के गलियारे में काम कर रहे लाइजनरों- दलालों को भी सुरक्षा मुहैया कराया गया, यह क्रम आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल खासकर भाजपा नेताओं या इसके विचारधारा से जुड़े लोगों के साथ खुलेआम भेदभाव किया जाने लगा।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हद तो तब हो गई कि जब जिला सुरक्षा समिति और राज्य सुरक्षा समिति की अनुशंसा पर लोगों को मिली सुरक्षा गैरकानूनी तरीके से छीन ली गई और अब उन्हें नहीं दी जा रही है। जबकि दूसरी ओर गैरकानूनी एवं मनमाने तरीके से सत्तापक्ष से जुड़ें लोगों को ही सुरक्षा मुहैया कराने में प्राथमिकता दी गई और अब भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का यह कदम सरकार की खामियों को प्रमुखता से उजागर कर रहे लोगों को भयाक्रांत कर उन्हें चुप कराने का साजिशपूर्ण प्रयास है।

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