December 3, 2020

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शहीदों का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता रहेगा-हेमन्त सोरेन

हूल दिवस पर राज्यभर में कई कार्यक्रम

राँची:- अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का प्रतीक हूल दिवस पर आज राज्य भर में कई कार्यक्रम आयोजित अमर शहीदों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानों सहित सभी वीरों को शत-शत नमन किया जा रहा है। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हूल दिवस पर सभी वीर शहीदों को नमन किया है। वहीं कोरोना संक्रमण काल के कारण सिदो-कान्हू की जन्मस्थली साहेबगंज जिले के भोगनाडीह में इस वर्ष किसी बड़े कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। सादगी से हूल दिवस पर वीर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने हूल दिवस के अवसर पर संताल विद्रोह के नायकों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा विद्रोह का नेतृत्व करने वाले सिदो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलों और झानों के साथ-साथ विद्रोह में शहादत देने वाले सभी वीरों का बलिदान सदैव झारखण्डवासियों को प्रेरित करेगा। यह महत्वपूर्ण दिवस है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में कार्यक्रम करना संभव नहीं था। व्यक्तिगत रूप में लोग इस दिवस को मना रहें हैं। उम्मीद करता हूं, जबतक झारखण्ड रहेगा शहीदों का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता रहेगा। सभी झारखण्डवासी इस गौरवपूर्ण दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को स्मरण करें, ताकि आने वाली पीढ़ी वीरों की वीर गाथा से अवगत हो गौरवान्वित हो सके। आइये मिलकर शहीदों के सपनों को साकार करें।
१८५५ के संताल विद्रोह की १६५वीं सालगिरह पर आज उपराजधानी दुमका में पोखरा चोकि स्थित सिदो-कान्हू की आदमकद कांस्य प्रतिमा पर विभिन्न संगठनों एवं संस्थानों के लोगों और राजनितिक दलों के नेताओं ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूर्व उपमुख्यमंत्री और महेशपुर के विधायक प्रो स्टीफन मरांडी, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, जामा की विधायक सीता सोरेन, झामुमो युवा छात्र मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत सोरेन ने भी सिदो कान्हू की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।

विकास भारती में सिद्धो-कान्हू,चांद भैरव, फूलो-झानो को दी गयी श्रद्धांजलि
रांची। विकास भारती बिशुनपुर के द्वारा बरियातु परिसर में हूल दिवस के अवसर पर सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरा तथा फूलो-झानो के प्रतिमा पर पद्मश्री डॉ0 अशोक भगत के द्वारा माल्यार्पण किया गया। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज में नेतृत्व की कमी कभी नहीं रही है। इतिहास में जब भी कुछ गलत हुआ है तो जनजाति समाज ने आगे बढ़कर इसका प्रतिकार किया है तथा समाज को एक साथ मिलाकर चलने का काम किया है।
ट्राईबल स्टडी सेन्टर के निदेशक डॉ0 प्रदीप मुण्डा ने कहा कि सिद्धू-कान्हू के हूल आन्दोलन से समाज और राष्ट्र की अपनत्व की प्रेरणा मिलती है और लोगों को सबक लेने की आवश्यकता है और उनके लिए एक सम्मान भाव के साथ खड़े होकर सम्मान की रक्षा करनी होगी। इस सभा में विकास भारती बिशुनपुर के सभी कार्यकर्त्ता उपस्थित थे। बंधन मुण्डा, सुनील तिग्गा, सम्राटसेन गुप्ता, सीताराम महतो, जीवनन्दन महतो के साथ-साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्त्ताओं ने दो मिनट का मौन व्रत रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किया।

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