November 26, 2020

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कांग्रेस नेतओं ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

राँची:- अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक हूल दिवस के मौके पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से राजधानी रांची के सिद्धो कान्हू ,चांद भैरो,फूलो झानो को याद किया एवं पार्क स्थित सिद्धू कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ,विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी,राजेश कच्छप,दीपिका पाण्डेय सिंह,प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव,डा राजेश गुप्ता छोटू,चैतू उराँव,सतीश पाल मुंजीनि समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
आदिवासी कांग्रेस के राँची जिला अध्यक्ष बेलस तिर्की के नेतृत्व में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। मौके पर अमर शहीद सिद्धू कान्हू ,फूलो-झानो की शहादत को नमन करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों से रचा बसा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के पहले ही आदिवासी समाज ने अपनी परंपरा और विरासत की रक्षा को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष किया, जिसके परिणाम स्वरूप एसपीटी और सीएनटी कानून बनाया गया। सिद्धू कान्हू के वंशज को लेकर की रही राजनीति पर डा उराँव ने कहा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड में करीब 16 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही। इस दौरान आदिवासियों के विकास और उनके कल्याण के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाएं। उन्होंने कहा कि लीज की जमीन लेकर पक्का मकान बनाया गया और यह आज भी जारी है बाबूलाल जी और भाजपा इसके खिलाफ आन्दोलन करे हम उधके साथ हैं।डा उराँव ने कहा कि एक प्रकरण को लेकर भाजपा जितना उद्वेलित हो रही है सोलह साल के अपने कार्यकाल में उस परिवार के लिए और संथाल के लोगों के लिए क्या किया इसका जवाब देना चाहिए।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं।
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि अमर शहीद सिद्धू कान्हू, फूलो और झानू की शहादत को इतिहास में पहला स्थान नहीं मिल पाया जिसकी वे हकदार थी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी शासन की ज्यादती के खिलाफ महिला होते हुए भी फूलो और झानो ने अपनी वीरता दिखाई और 21 अंग्रेजी सैनिकों को मार डाला। परंतु जिस तरह से रानी लक्ष्मीबाई की वीरता,बलिदान और संक्रांति को इतिहास में स्थान मिला वह स्थान हूल दिवस को नहीं मिल पाया।
कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि अन्याय जुल्मी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक हूल दिवस की शहादत को कभी भुला नहीं जा सकता है। शहीदों ने जिस सपने को लेकर अपनी शहादत दी थी राज्य सरकार उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रयत्नशील है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सतीश पाल मुंजीनि,शशि भूषण राय,डा विनोद सिंह,संजय पाण्डेय,सुरेश बैठा,कंचन कुमारी,अजय सिंह,फिरोज रिजवी मुन्ना,अमिताभ रंजन,जितेन्द्र त्रिवेदी,उपस्थित थे।

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