November 29, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

क्यों है भारत, नेपाल और भूटान को अपनी दोस्ती में चीनी कम करने की ज़रूरत ?

किशनगंज:- भूटान, नेपाल और भारत एक लंबे अरसे से एक दूसरे  के मित्र राष्ट्र हैं । नेपाल और भारत के बीच में सुगौली संधि के बाद आए दिन छुटपुट विवाद तो होते रहते थे पर कभी भी आज जैसी स्थिति नहीं आई और इसका कारण नेपाल में चीन का बढ़ता प्रभाव है ।

चीन ने भूटान के साथ भी वही पैंत्रे अपनाएं पर वह भूटान के सामने काम नहीं आए । भूटान भारत का एकमात्र दोस्त है, जिसने कई प्रलोभन के बावजूद भी भारत का साथ नहीं छोड़ा । भूटान और भारत सन 1949 से एक दूसरे के मित्र राष्ट्र हैं। भारत सरकार ने भी भूटान की हर संभव मदद की और वही भूटान ने भी भारत की मित्रता को कभी नहीं ठुकराया ।

हेनरी किस्सिंगर ने कभी कहा था कि


जियो पॉलिटिक्स में कभी स्थाई दोस्त या स्थाई दुश्मन नहीं हुआ करते सिर्फ अपना मतलब होता है, परंतु भूटान के संदर्भ में यह बात सटीक नहीं बैठती । भारत ने भी भूटान की हर संभव मदद की और भूटान की रक्षा की वहीं भूटान ने भारत का भरपूर साथ दिया । सन 2018 में डोकलाम विवाद के बाद चीन ने भूटान को 10 बिलियन डालर का प्रलोभन दिया था पर भुटान ने उसे ठुकरा दिया । चीन ने भूटान को कहा था कि आप भी बीआरआई में सम्मिलित हो जाएं लेकिन भुटान ने बीआरआई में भी समम्लित होने से इनकार कर दिया ।

यदि आपको 10 अरब डालर कम लग रहें हो तो बता दें कि भूटान जैसे छोटे राष्ट के लिए 10 बिलियन डॉलर बहुत बड़ी रकम है ।भुटान की आबादी केवल आठ लाख है लेकिन इसके बावजूद भी भूटानी सरकार ने ना तो चीन के दबाव में और ना ही चीन के प्रलोभन में आकर भारत से अपने रिश्ते खराब किये।

अगर बात नेपाल की करें तो नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है जिसमें चीन का दखल पहले से बहुत अधिक बढ़ गया है । चीन आए दिन नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता रहता है और जिसके कारण भारत और नेपाल के संबंध कड़वे होते जा रहे हैं। नेपाल चीन की एक बड़ी नीती का हिस्सा है। जिसकी पहली झलक मिल चुकी है। हाल में ही चीन ने नेपाल की 1 गांव का अतिक्रमण किया है। नेपाल में इस बात को लेकर काफी विवाद हुआ लेकिन नेपाली प्रधानमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया ।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के जनक माओ ने अपने एक भाषण के दौरान कहा था कि तिब्बत की पांच उंगलियां हैं भूटान ,नेपाल ,वर्मा , सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जिसे चीन की कम्युनिस्ट सरकार भविष्य में अपने कब्जे में लेगी । अतः यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि चीन का नेपाल प्रेम सिर्फ एक छलावा है उसका असली मकसद नेपाल की स्वतंत्रता को और नेपाल की जमीन का अतिक्रमण करना है।

सवाल यह उठता है कि भारत को चीन की नीतियों से परेशान होना चाहिए या नहीं? जवाब है बिल्कुल होना चाहिए क्योंकि चीन की नीतियों की वजह से भारत के लिए भविष्य में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अभी हमारे पास नेपाल जैसे पुराने मित्र राष्ट्र को चीनी प्रभाव में आने से रोकने की चुनौती है,वही भूटान को को भी भविष्य में किसी भी तरह की चीन के छलावे से दूर रखना है। हम में से कोई नहीं चाहेगा कि नेपाल और भूटान के साथ भी वही हो जो तिब्बत के साथ हुआ । ऐसे में सिर्फ हमारे मित्र राष्ट्र कम नहीं होंगे बल्कि चीन हमारी सीमा के काफी करीब आ जाएगा जिससे कई समस्याएं उत्पन्न होती रहेंगी।

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