November 29, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत

सर्वे के दौरान अति कुपोषित बच्चों को कुपोषण उपचार केंद्र में इलाज के लिए भेजने का निर्देश

चाइबासा:- पश्चिमी सिंहभूम जिला के उपायुक्त अरवा राजकमल के द्वारा जानकारी दी गई कि जिला प्रशासन के द्वारा जिले में कुपोषण को जड़ से मिटाने हेतु लगातार अपने स्तर से प्रयास किया जा रहा है जिसके तहत जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी तथा समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारी को शामिल करते हुए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जिले में संचालित 05 कुपोषण उपचार केंद्र के कुल 60 शैय्या का लगातार अवलोकन किया जा रहा है तथा आंगनबाड़ी केंद्र की सेविकाध्सहायिका द्वारा घर-घर जाकर सर्वे करने के दौरान ज्ञात में आने वाले वैसे अति कुपोषित बच्चे जिनका इलाज केंद्र में रखकर किया जाना है को तत्काल इन केंद्रों में रिक्त शैय्या पर भर्ती करते हुए प्रतिनियुक्त चिकित्सक की निगरानी में उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक इलाज किया जाता है तथा इन केंद्रों पर ही बच्चों के साथ उनके माता के रहने की भी व्यवस्था उपलब्ध रहती है जिससे बच्चों की उचित देखभाल की विधि की जानकारी उन्हें प्राप्त हो और उनका बच्चा कुपोषण जैसी बीमारी से सुरक्षित रहे।

कोविड-19 के दौरान भी अति गंभीर कुपोषित बच्चों पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान

उपायुक्त ने बताया कि अभी वर्तमान समय में कोविड-19 के दौरान भी अति गंभीर कुपोषित बच्चों के रेफरल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा कोविड-19 के अंतर्गत आवश्यक दिशा निर्देश का अनुपालन करते हुए बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि अति गंभीर कुपोषित बच्चों के रेफरल का दैनिक अनुश्रवण जिला समाज कल्याण कार्यालय के द्वारा उक्त व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से किया जाता है। उन्होंने बताया कि उक्त व्हाट्सएप ग्रुप में वरीय पदाधिकारियों के साथ कुपोषण उपचार केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा प्रतिदिन उपचार केंद्र में उपलब्ध बेड की स्थिति साझा की जाती है तथा उक्त सूचना पर संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और महिला पर्यवेक्षिका के द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जाती है और केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा बेड खाली होने से 3 दिन पूर्व ग्रुप में इसकी सूचना दी जाती है ताकि अति गंभीर कुपोषित बच्चों के रेफरल हेतु सभी आवश्यक कार्यवाही पूर्व से ही सुनिश्चित रहे एवं बच्चों को ससमय इलाज उपलब्ध हो।

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