November 25, 2020

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धान की चार नई किस्म विकसित, पानी की किल्लत वाले राज्यों के लिए भी होगा फायदेमंद

हजारीबाग:- हजारीबाग के मासीपीढ़ी स्थित केंद्रीय उपरांव भूमि चावल अनुसंधान केंद्र ने धान की चार नई किस्में विकसित की हैं। ये किस्में झारखंड समेत देश में पानी की किल्लत वाले राज्यों के लिए बेहद फायदेबंद हैं। ये चार किस्में उपरांव व सिचित दोनों क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है। इसमें झारखंड के उपरांव भूमि के लिए सीआर धान 103 प्रमुख है। इसके अलावा झारखंड, तामिलनाडू, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के वर्षाश्रित और सिचित दोनों जमीन के लिए आइआर 64 सूखा एक किस्म विकसित की गई। कर्नाटक के सिचित तीन जमीन के लिए गंगावती अगेती और गुजरात के उपरी भूमि के लिए पूर्णा किस्म की धान का भी विकास किया गया है। ये किस्म उपरांव भूमि में कम पानी व कम अवधि में तैयार हो जाएगी। ये किस्में सिर्फ एक से दो पटवन में किसानों को बंपर पैदावार उपलब्ध कराएगी। साथ ही साथ धान की गुणवत्ता भी काफी हद तक बरकरार रहेगी। जानकारी के अनुसार यह किस्म 90 से 125 दिनों में तैयार हो जाएगी। इसके अलावा केंद्र द्वारा करीब डेढ़ हजार प्रजाति का संग्रह भी किया जा चुका है। उपरांव भूमि के विकास के लिए धान की नई प्रजाति विकास के लिए अनुसंधान के साथ साथ केंद द्वारा धान आधारित फसल चक्र को बढ़ावा दिया जाता है। केंद्र में कुल पांच स्कालर या वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर रिसर्च पूरी कर चुके हैं जबकि एक की जारी है। वहीं दो रिसर्च फेलो सूखा आधारित बॉयोटेक्नोलाजी एवं समेकित कीट प्रबंधन पर रिसर्च कर रहे हैं। केंद्र प्रमुख के रूप में डा. दीपांकर मैथी सहित कुल छह वैँज्ञानिक पदस्थापित हैं। वहीं केंद् में कुल 35 कर्मी भी पदस्थापित हैं। तक पूर्व की विकसित किस्मों की बात है तो सबसे पहली प्रजाति वंदना थी जो 90 से 95 दिनों में उपज देती है। मध्यम भूमि के लिए यहां की विकसित प्रमुख प्रजाति में सहभागी धान और सूखा आधारित प्रजाति आइआर 64 सूखा प्रमुख है। स्थापना काल से लेकर अब तक केंद्र द्वारा धान की कुल 14 प्रजाति का विकास किया जा चुका है। केंद्र की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य उपरांव भूमि में चावल की उत्पादकता बढ़ाना, स्थानीय प्रजाति को उपरी जमीन के लिए विकसित करना तथा धान आधारित फसल चक्र को बढ़ावा देना था। स्थापना काल से लेकर अब तक केंद्र द्वारा धान की कुल 14 प्रजाति का विकास किया जा चुका है।
ज्ञात हो कि केंद्रीय वर्षाश्रित उपरांव भूमि चावल अनुसंधान केंद् मासीपीढ़ी (हजारीबाग) की स्थापना भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र (आइसीएआर) दिल्ली की अधीनस्थ संस्था राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र (एनआरआरआइ) कटक के टेस्टिग स्टेशन के रूप में 1980 में की गई थी। इसे 1983 में सब स्टेशन बनाया गया था और 1986 से इसे एनआरआरआइ कटक के अभिन्न अंग के रूप में संचालित किया जाने लगा।

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