November 23, 2020

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मंत्री को अविलंब गिरफ्तार करवाकर जेल में डालिए-बाबूलाल मरांडी

मंत्री को अविलंब गिरफ्तार करवाकर जेल में डालिए-बाबूलाल मरांडी
बिहार में स्थापित जंगलराज की यादें ताजा हो रही हैं
रांची। बीजेपी विधायक दल के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने टेंडर मैनेज प्रकरण में विवादों में घिरे राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने मौजूदा शासन व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पुराने समय में बिहार में स्थापित जंगल राज की यादें आज ताजा हो रही है।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बुधवार को लिखे पत्र में कहा कि साहेबगंज जिले के बरहड़वा नगर पंचायत के सैरात बंदोबस्ती प्रक्रिया में हुई मारपीट और इस प्रक्ररण में मंत्रिमंडल के सहयोगी मंत्री आलमगीर आलम और बरहेट विधानसभा से आपके प्रतिनिधि पंकज मिश्रा की भूमिका को लेकर और इनकी करतूतें आज के समाचार-पत्रों में भी प्रमुखता से छपी हैं। वहीं इससे संबंधित इन लोगों का धमकी भरा एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। निश्चित रूप से यह काफी गंभीर व संगीन मामला तो है ही, साथ ही राज्य सरकार के माथे पर एक बदनुमा दाग भी है।
बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी मंत्री का काम कानून का शासन स्थापित करना-कराना और सरकारी राजस्व के हितों की रक्षा करना है, न कि सत्ता की ताकत का दुरूपयोग कर ठेका-पट्टा मैनेज कराकर सरकारी राजस्व को नुकसान पंहुचाना ? सरकार के मंत्री और आपके प्रतिनिधि ने जिस प्रकार इस मामले में सत्ता का धौंस जमाकर क्षेत्र में खौफ पैदा करने का काम किया है, वह उचित नहीं ठहराया जा सकता है। पहले तो मंत्री और विधायक प्रतिनिधि द्वारा ठेकेदार को टेंडर में भाग नहीं लेने की धमकी दी गई। फिर पुलिस-प्रशासन के सहयोग से ठेकेदार को बंदोबस्ती स्थल तक नहीं पहुंचनें देने का जी-तोड़ प्रयास किया गया। बावजूद जब ठेकेदार ने बंदोबस्ती स्थल पर पहुंच कर टेंडर में भाग लेना चाहा तो पुलिसिया जांच के बहाने उसे बाहर निकलवाकर उसके साथ मारपीट तक की गई। इस पूरे प्रक्ररण को देखकर कभी बिहार में स्थापित जंगलराज की यादें ताजा हो रही हैं।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री पारदर्शी शासन का दंभ भरते हैं। अगर वास्तव में मुख्यमंत्री राज्य को पारदर्शी शासन देना चाहते हैं तो मंत्री और विधायक प्रतिनिधि को अविलंब गिरफ्तार करवाकर जेल में डाले। उन्होंने गिरफ्तारी के बाद इस मामले की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच करायी जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है और मामले की लीपापोती का प्रयास किया जाता है तो माना जाएगा कि सब कुछ मुख्यमंत्री के संरक्षण में हो रहा है।

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