November 25, 2020

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झारखंडी विचारधारा सिर्फ एक राजनीतिक स्लोगन बनकर रह गया है : सुदेश महतों

राँची:- हरमू, रांची स्थित पार्टी मुख्यालय में ऑनलाईन संकल्प सभा आयोजित किया गया। इस अवसर पर आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने सभा को ऑनलाईन संबोधित करते हुए कहा कि इस वैश्विक महामारी के दौर में पार्टी के विचारों को जनता तक पहुँचाने के लिए हमनें डिजिटल माध्यम को अपनाया।

झारखंड के तमाम शहीदों तथा गलवान घाटी में शहीद हुए सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक दिन है। यह दिन भारत के लोकतंत्र तथा मानचित्र में अंतर पैदा करने वाला दिन है। इसी दिन नौजवानों ने झारखंड की भावी कल्पना को मूलस्वरुप में लाने के लिए नेतृत्व देने का संकल्प लिया था। आज का दिन चिंतन और मंथन का है। अलग झारखंड राज्य का सपना आज भी अधूरा है। यह कोरोना काल हमारे लिए चेतावनी का काल है। इसने हमारे समक्ष कई विषयों को खड़ा किया है। हमारे जीने का अन्दाज बदला है। लाखों प्रवासी श्रमिक जो रोजी-रोटी के लिए राज्य से पलायन कर गए थे, उनकी घर वापसी हुई है। उन्हें रोज़गार मुहैया कराना राजनीति और राजनेताओं के लिए चुनौती का विषय है। सारी संस्थाओं के एक साथ लॉकडाउन होने से वित्तीय ढांचा हिल चुका है। लोगों को रोज़ी-रोटी के लिए सोचना पड़ रहा है। आज आरोप-प्रत्यारोप का वक्त नहीं बल्कि मूल्यांकन का वक्त है। हमें अब नए सिरे से राजनीति को बदलने की आवश्यकता है तथा लोक संपत्ति को निजी संपत्ति बनने से रोकना होगा। निजी संस्थाओं ने जो देश के प्रति भागिदारी एवं योगदान दिया है उसका मूल्यांकन करना जरुरी है।श्रम को संपत्ति बनाने की आवश्यकता है, जो भविष्य में भी लगातार आय का श्रोत बना रहे। सरकार के निर्णयों में विचारधाराओं को समाहित करना होगा। सरकार के आय का एकमात्र उपाय जनता पर करों का बोझ है। इसके विकल्प तलाशने होंगे। सरकारी योजनाओं को बन्द या स्थगित कर रोज़गार बढ़ाना असंभव है, इसके लिए तुरंत व्यापक स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चालू करने की आवश्यकता है। ग्रामीण गृह उद्योग को बढ़ावा देना होगा। शिक्षा का मतलब बदलना होगा। शिक्षा सिर्फ सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं रहे यह सुनिश्चित करना होगा। अगर हम संपूर्ण बीमारियों के मूल जड़ को देखेंगे तो सबके पीछे पानी और आहार ही कारण है। राज्य के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने का समय है। लोगों को पौष्टिक आहार एवं शुद्ध पेयजल मुहैया कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आज झारखंडी विचारधारा सिर्फ एक राजनीतिक स्लोगन बनकर रह गया है। झारखंडी सोच या झारखंडी विचारधारा सिर्फ एक काल्पनिक पूंजी बनकर नहीं रह सकती। इसे अपने निर्णयों और कार्यक्रमों में परिलक्षित करने की जरुरत है।

राज्य निर्माण के इतने वर्षों के बाद भी आंदोलकारियों को सम्मान नहीं मिल सका-
पार्टी के वरीय उपाध्यक्ष एवं गिरीडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने सभी शहीदों को नमन करते हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं शुभचिंतकों को धन्यवाद दिया। कहा कि राज्य निर्माण के इतने वर्षों के बाद भी आंदोलकारियों को सम्मान नहीं मिल सका है। साथ ही पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी कर्मियों एवं अनुबंधकर्मियों के स्थायीकरण का संकल्प लेते हुए कोरोना काल में सहयोग करने वाले सभी कार्यकर्ताओं को नमन किया।

आजसू पार्टी झारखंड और झारखण्डियत की लड़ाई लड़ती रहेगी


पार्टी के महासचिव लंबोदर महतो ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उन तमाम शहीदों की शहादत को नमन करने का दिन है जिनके बदौलत झारखंड अलग राज्य का निर्माण हुआ। भय, भूख, भ्रष्टाचार तथा जल, जंगल, जमीन के नाम पर सत्ता में आयी वर्तमान सरकार यह सब भूल चुकी है। 1932 खतियान तथा अनुबंध कर्मियों का स्थायीकरण का मुद्दा सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि आजसू पार्टी झारखंड और झारखण्डियत की लड़ाई लड़ती रहेगी।

राज्य की बेहतरी एवं झारखंड की जनता के सुख, शांति तथा समृद्धि के लिए एक बार फिर संघर्ष करने की आवश्यकता है
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री एवं पार्टी के महासचिव रामचंद्र सहिस ने कहा कि राज्य की बेहतरी एवं झारखंड की जनता के सुख, शांति तथा समृद्धि के लिए एक बार फिर संघर्ष करने की आवश्यकता है। राज्य की वर्तमान सरकार पूरी तरह से बेमेल है जो जनता को सिर्फ ख्वाब दिखाना जानती है। साथ ही उन्होंने पारा शिक्षिकों, आंगनबाड़ी कर्मियों तथा सभी अनुबंध कर्मियों के स्थायीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आशा करते हैं सरकार इसपर जल्द ही कार्रवाई करेगी। नहीं तो आजसू पार्टी सड़क से लेकर संसद तक इसके लिए संघर्ष करेगी।

राज्य की मर्यादा एवं जनमन की सुरक्षा का दायित्व लेने का संकल्प लें
पार्टी के मुख्य केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने कहा कि  आज का दिन झारखंड के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन है। 34 साल पूर्व आज ही के दिन झारखंड के नौजवानों ने एक नए वैचारिक आधार का नींव डाला था। आज ही के दिन युवा छात्रों ने ‘‘अब समझौता नहीं संघर्ष होगा’’ का नारा बुलंद किया था. उसी के परिणामस्वरुप अलग झारखंड राज्य का निर्माण हुआ। हमें अलग राज्य तो मिला लेकिन स्वराज्य नहीं मिला। हमनें राज्य में मजबूर सरकार भी देखी और मजबूत सरकार भी देखी लेकिन अलग राज्य के सपने आज भी अधूरे हैं। राज्य निर्माण के बीस साल बाद भी झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान नहीं मिला उन्हें पुनर्वासित नहीं किया गया। आज इस ऐतिहासिक दिवस पर हम राज्य की मर्यादा एवं जनमन की सुरक्षा का दायित्व लेने का संकल्प लें। वैचारिक मूल्यों को बचाने का संकल्प लें। आइये, आज इस ऐतिहासिक दिवस पर झारखंड आंदोलन के सपनों को हर हाल में पूरा करने का संकल्प लें।

इस अवसर पर केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी, केंद्रीय महासचिव राजेंद्र मेहता, आजसू बुद्धिजीवी मंच के केंद्रीय अध्यक्ष डोमन सिंह मुण्डा, महिला केंद्रीय अध्यक्ष वायलेट कच्छप मुख्य रूप से उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन पूर्व विधायक शिव पूजन मेहता ने की।  

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