December 1, 2020

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अनुदानित शिक्षा नीति सभ्य और शिक्षित समाज में कोढ़ : आलोक आज़ाद

पटना:- अनुदानित शिक्षा नीति सभ्य और शिक्षित समाज में कोढ़ की तरह है। इसमें बहुत कम अनुदान राशि के रुप में मिलने वाले वेतन पर शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाना पड़ता है।जोकी प्रतिमाह की गणना की जाए तो कहीं कहीं प्रतिमाह दस हजार तो कहीं कहीं पंद्रह हजार भी नहीं मिल हो पाता है बावजूद शिक्षक पढ़ा रहे हैं। सरकार को जल्द से जल्द वित्त रहित शिक्षा नीति को खत्म करने की कार्रवाई की जानी चाहिए।

उक्त बातें साथी परिषद के अध्यक्ष तथा सामाजिक कार्यकर्ता आलोक आजाद ने कहा। वे शनिवार को शिक्षकों के साथ ज़ूम एप्लिकेशन के माध्यम से वर्तमान परिवेश में अनुदानित शिक्षकों की दशा व दिशा विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने अनुदानित शिक्षा पद्धति को जल्द से जल्द खत्म करने पर बल दिया और कहा कि बिहार सरकार खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को वित्तरहित तथा नियोजित शिक्षकों की समस्या को लेकर गंभीर होना चाहिए। सरकार को इस दिशा में लगातार काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई की आने वाले दिनों में इसका रास्ता अवश्य निकलेगा और अनुदानित या वित्तरहित शिक्षा व्यवस्था पुराने दिनों की बात होगी।

उन्होंने कहा कि अनुदानित या वित्तरहित शिक्षक आर्थिक संकट से लगातार गुजर रहे हैं। इस पर सकारात्मक पहल होनी चाहिए। मुख्यमंत्री को अनुदानित तथा वित्तरहित शिक्षकों की दशा‌ तथा वितरण रहित शिक्षा नीति को समाप्त कराने की पहल कर शिक्षकों को सम्मान दिलाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षकों की स्थिति काफी दयनीय है। अनुदानित,वित्तरहित व नियोजित शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष घोर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। ये व्यवस्था सरकार की शिक्षा नीति पर प्रश्न खड़े करती है। राज्य व केंद्र सरकार को इसका जल्द समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सेमिनार में आए सभी शिक्षकों के सुझाव के आधार पर वह एक शिक्षा का मसौदा तैयार कर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पाण्डेय तथा अन्य शिक्षक प्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के सभी उच्च पदाधिकारियों के साथ साथ मुख्यमंत्री,उप मुख्यमंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष को देंगे ताकी वो इसपर आवश्यक पहल करते हुए केंद्र व राज्य सरकार पर दवाब बनाकर समाधान का रास्ता साफ करवाएं। इसमें वित्तरहित व नियोजित शिक्षकों के लिए समाधान का सुझाव होगा।

उन्होंने कहा कि छह वर्षों से इंटर तथा नौ वर्षों से डिग्री शिक्षकों के अनुदान की राशि बकाया रहने से वित्तरहित कालेजों के अनुदानित शिक्षकों, कर्मियों व उनके परिजनों के समक्ष लॉकडाउन में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सरकार से कोरोना महामारी जैसे राष्ट्रीय विपदा की घड़ी में माध्यमिक से डिग्री स्तर तक के वित्तरहित कर्मी व अनुदानित कोटि के मदरसा व संस्कृत शिक्षण संस्थानों के शिक्षक कर्मचारियों को लंबित अनुदान राशि भुगतान करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की घोषणा है कि वित्तरहित शिक्षक कर्मियों को विगत छह वर्षों के बकाए अनुदान की राशि उपलब्ध करा दी जाएगी। होली से पहले ही उसने कर्मियों के खाते में पैसा भेजने की बात की थी। इसके लिए वित्त विभाग से पैसे भी आवंटित हो चुके हैं। मात्र शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री में इच्छा-शक्ति की कमी, उनकी हठधर्मिता के कारण ये हजारों कर्मी अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ घर में लॉकडाउन हो दाने- दाने को रहे हैं।

आलोक ने यह भी कहा कि इन शिक्षक-कर्मियों के लाखों रुपए सरकार के पास बकाया है और शिक्षक अपने परिवार के लोगों को भोजन और दवाई के लिए पड़ोसी के पास हाथ फैल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अनुदानित तथा वित्तरहित शिक्षा नीति जैसे कोढ़ को समाप्त करने की दिशा में सीएम नीतीश व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने तत्परता दिखाई। लेकिन अनुदान भुगतान के नाम पर सुस्त हो गयी। सरकार मानवता व न्यायहित में अविलंब अनुदान राशि शिक्षक-कर्मियों के खाते में भेजे।

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