November 24, 2020

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बारिश में छिपा सूर्य ग्रहण, अधिकांश हिस्सों में खगोलीय घटना का लुत्फ नहीं सके लोग

राँची:- सूर्य ग्रहण के खगोलीय घटनाक्रम को देखने के लिए दुनिया भर में उत्सुकता रही, लेकिन झारखंड के अधिकांश हिस्सों में सूर्य ग्रहण के दौरान आसमान में बादल छाये रहने से लोगों को भारी निराशा हाथा लगी। वहीं खगोलीय विज्ञान के अनुसार 21 जून का दिन सबसे लंबा और रात सबसे छोटी होती है। 21 जून को सूर्य जब कर्क रेखा से गुजरती है, तब उसकी किरणे लंबवत पड़ती है और एक समय ऐसा भी आता है, जब व्यक्ति की परछाई भी नहीं बनती है। भारत में कर्क रेखा 8 राज्यों से होकर गुजरती है,जिसमें झारखंड भी शामिल है। राजधानी रांची से 23 किलोमीटर दूर ओरमांझी में कर्क रेखा प्वाइंट बनाया गया है। खगोलीय गणना में कर्क रेखा का बड़ा ही महत्व है, ये एक अद्भूत संयोग है कि इसी दिन सूर्यग्रहण भी पड़ा। आज के दिन का लोग काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे, लेकिन मौसम पूर्नानुमान सही साबित हुआ और आसमान में बादल छाये रहने से लोग इस अदभूत नजारे को देखने से चूक गये। लोग न सिर्फ सूर्य ग्रहण का नजारा देखने से चूके, बल्कि कर्क रेखा पर दोपहर 12 बजे जब किरणों लंबवत बनती है, तो परछाई भी छिप जाती है, उस नजारे को देखने में असफल रहे।

कर्क संक्रांति पर सूर्य की किरणों लंबवत धरती पर पड़ती है

राज्य के प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. नितिश प्रियदर्शी ने बताया कि 21 जून को कर्क संक्रांति के रूप में भी खगोलविद मनाते है, इस दिन सूर्य की किरणों दोपहर 12 बजे लंबवत धरती पर पड़ती है और ऐसा माना जाता है कि कुछ क्षणों के लिए व्यक्ति की परछाई भी उनका साथ छोड़ जाती है। यह दिन सबसे लंबा होता है और गर्मी भी अधिक होती है, इसके बाद से ही दिन छोटी और रातें लंबी होनी शुरू होती है।

घने बादलों के कारण सूर्यग्रहण देखने से चूके

इधर,सूर्य ग्रहण को लेकर भी आमजनों में भी खासा उत्साह था। राजधानी रांची में करीब पांच घंटे से अधिक समय के सूर्य ग्रहण का स्पर्शकाल सुबह 9.16मिनट रहा, वहीं दोपहर 12.10 मिनट मध्य काल और अपराह्न 3.04 मिनट मोक्षकाल रहा। इस पूरे पांच घंटे के दौरान आसमान में बादल छाये रहे,जिससे लोगों को यह भी जानकारी नहीं मिल पायी, कि कब सूर्य ग्रहण शुरू हुआ और कम मोक्षकाल आया। हालांकि दोपहर सवा बजे बादलों के बीच ही आसमान में थोड़ा अंधकार छाने से लोगों को सूर्य ग्रहण का हल्का अहसास जरूर हुआ, लेकिन बच्चे सूर्य ग्रहण को अपन आंखों से देखने से जरूर चूक गये।

सड़कों पर सन्नाटा,मंदिरों का पट रहा बंद

सूर्य ग्रहण को लेकर आज सड़कों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। लॉकडाउन 5.0 और अनलॉक 1.0 में ऐसे ही आर्थिक गतिविधियां कम रह रही है, वहीं सूर्य ग्रहण के दौरान पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लोगों ने घर में पर ही रहना बेहतर रहना उचित समझा। इस दौरान सभी मंदिरों के पट बंद रहे, वहीं लोगों ने सूर्य ग्रहण के पहले ही नाश्ता कर लिया था और ग्रहण काल समाप्त हो जाने के बाद दोपहर का भोजन किया।

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