November 27, 2020

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कॉमर्शियल माइनिंग से और समृद्ध होगा कोयला उद्योग : सीआईएल चेयरमैन

टेड-एक्स कांके ने किया वेबिनार का आयोजन।

राँची:- टेड-एक्स-कांके ने “द राइज ऑफ ए न्यू वर्ल्ड” के अंतर्गत ‘कोविड-19 के बाद नई कोयला खनन रणनीति’ पर वेबिनार का आयोजन किया। टेड-एक्स-कांके के क्यूरेटर राजीव गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित इस वेबिनार का टेड-एक्स कांके के फेसबुक चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया गया। वेबिनार के मुख्य वक्ता कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने अपनी बात रखी।

कोयला क्षेत्र के लिए वर्तमान आर्थिक परिदृश्य एवं चुनौतियों पर प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 से पूर्व वैश्विक स्तर पर दो-तीन प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान के विपरीत अर्थव्यवस्था में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट आयेगी। एडीबी की रिपोर्ट बताती है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था में चार प्रतिशत की गिरावट हो सकती है। पिछले 3 महीनों में हमारी ऊर्जा मांग में 22 प्रतिशत और कोयले की मांग में 27 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। कोयला डिस्पैच में भी कमी आई है। हालात सुधरने से पहले यह स्तर और नीचे जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा और भंडारण की कीमतें नीचे जा रही है। ऐसे में भारत द्वारा पेरिस समझौते के तहत 50 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा हिस्सेदारी का लक्ष्य प्राप्त करना एक और चुनौती है। 2040 तक कोयला ही प्राथमिक ऊर्जा स्रोत बना रहेगा। कोयले के कॉमर्शियल माइनिंग से कोयला उद्योग और बाजार और अधिक समृद्ध होगा। फिक्स्ड प्राइस सेलिंग के बजाय मार्केट प्राइस सेलिंग के कारण कोयला सेक्टर का मुनाफा बढ़ेगा। हमारे पास आयात को प्रतिस्थापित करने का भी एक अवसर है। 240 मिलियन मीट्रिक टन आयात में से 150 मिलियन मीट्रिक टन को कम किया जा सकता है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि हम कोयले की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। लेकिन भारत में यह थोड़ा मुश्किल है। यहां कोयला फ्लो में उपलब्ध तो है। लेकिन इसकी आपूर्ति या मात्रा हमेशा से एक मुद्दा बनी रही है, क्योंकि हमने हमेशा से एक अभाव में काम किया है। यदि श्रम, बाजार और पर्यावरण संबंधी मंजूरी के संबंध में सरकार की नीतियों को सुव्यवस्थित कर दिया जाए, तो इससे हमें अपने उत्पादन को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर प्राप्त होगा। कोयला क्षेत्र के विकास व खनन निवेश के मामले में तेजी आई है। निवेश 8-9 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 20-25 हजार करोड़ रुपये तक हो गया है। इससे गुणवत्ता में सुधार होगा और उपभोक्ता आधार बना रहेगा।

कोयला क्षेत्र की चुनौती और किये जानेवाले जरूरी कार्यों के बाबत श्री अग्रवाल ने कहा कि इस क्षेत्र में नई तकनीक को अपनाने की गति धीमी है। जिसे बढ़ाने की जरूरत है। अगले 3-4 वर्षों में, हम अधिक से अधिक सरफेस माइनरों को रोजगार दें, ताकि गुणवत्ता बढ़ सके। कोयला निकासी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में इन्वेस्ट करने और यांत्रिकिकरण पर फोकस करना होगा। बेहतर लाभ के लिए नई तकनीक जैसे कोयले के रासायनिक रूपांतरण, गैसीकरण आदि में निवेश करना होगा।

उन्होंने कहा कि बिज़नेस मॉडल में अपेक्षित सुधार चल रहा है। भूमिगत, खुली और बंद खदानों को निजी एजेंसियों को लंबी अवधि के लिए देने की योजना है। इसके लिए अनडेवेलप 15 ग्रीनफील्ड की पहचान की गई है। जिससे 165 मिलियन टन कोयला उत्पादन में वृद्धि होगी। अब हमें खनन 4.0 के बारे में बात करनी होगी। इसके लिए मौजूदा प्रौद्योगिकी के संचालन और निर्णय लेने की क्षमता को एकीकृत करना होगा। हमारे कार्यबल को भी प्रशिक्षण देना होगा। हमने परियोजना प्रबंधन के लिए जरूरी उपाय किये हैं। जिससे ऑर्गनाइजेशन के अंदर सुधार के उपायों की पहचान हो रही है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को ठीक करने में मदद मिल रही है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि डेटा विश्लेषण और फीडबैक के क्षेत्र में भी कार्य की जरूरत है। ऑर्गनाइजेशन की कार्य क्षमता बढ़ाने में ईआरपी टूल्स से काफी मदद मिलेगी। इससे फीडबैक प्राप्त करने में सटीकता और तेजी आएगी। सितंबर 2021 तक ईआरपी को सभी जगह स्थापित कर दिया जाएगा। हालांकि यह कार्य काफी पहले हो जाना चाहिए था। वर्तमान में हमारे पास बेहतर तरीके से डेटा विश्लेषण की सुविधा नहीं है। इसलिए ईआरपी की स्थापना से प्राप्त डेटा और फीडबैक विश्लेषण के आधार पर तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है। इससे ग्राहकों के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही वैसे सभी अनुबंधों को अलग-अलग रखा जा सकेगा, जो ग्राहकों की उम्मीद पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं।

वेबिनार के अंत में आईसीएफएआई के वाईस चांसलर डॉ ओआरएस राव के एक प्रश्न के जवाब में कोल इंडिया चेयरमैन ने कहा कि माइनिंग क्षेत्र के विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान और व्यवहारिक चुनातियों को सीखना होगा। इंटर्नशिप के दौरान जमीनी अनुभवों से अपने सैद्धान्तिक ज्ञान को एकीकृत करना होगा। राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार, आईएएस सुनील बर्णवाल ने भी चेयरमैन से कमर्शियल माइनिंग और इस संबंध में कोल् इंडिया की योजनाओं के बाबत सवाल किया।

वेबिनार के सफल आयोजन में संतोष शर्मा, कनिष्क पोद्दार, कनिका मल्होत्रा, कैलाश मांझी, बिजेंद्र शर्मा, संतोष शर्मा, विपुल मंयक, निलय वर्णवाल, ऋषभ मल्लिक, प्रवीण राजगढ़िया ने अहम भूमिका निभाई ।

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