November 25, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

क्रिया योग का अर्थ योगासन नहीं, ईश्वर की प्राप्ति है-स्वामी ईश्वरानन्द गिरि,

राँची:- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर यह जानना जरूरी है कि जिसे आज विश्व अपना रहा है, वह क्रिया योग है क्या और इसकी महिमा क्या है? जो लोग इसे अपना चुके हैं, वे निश्चय ही जानते होंगे कि यह हठयोग जैसा कुछ भी नहीं है,अपितु यह एक जीवनशैली है।इससे आधुनिक विश्व को परमहंस योगानन्द ने परिचित कराया था।
योगानन्द ने आम भारतीय को इससे अवगत कराने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट दिहिका में योग विद्यालय की स्थापना 1917 में की थी लेकिन एक साल बाद ही वे इसे राँची ले आए। यहाँ का सिम बाजार के राजा ने अपना एक विशाल बाग, जिसमें रहने का स्थान भी बना हुआ था, उनको उपलब्ध करा दिया था। यहाँ वह आवासीय योग विद्यालय चलने लगा, जिसमें सामान्य विषयों की भी पढ़ाई होती थी। बाद में उन्होंने योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया का पंजीकरण कराया।
योग का मतलब
सामान्यतया योग का मतलब हठयोग के आसनों या अन्य तरह के आसनों सेलगाया जाता है। क्रिया योग आसन नहीं है। यह एक ऐसा वैज्ञानिक मार्ग है, जिस पर चल कर जीवन परिवर्तित होकर आध्यात्मिक बन जाता है तथा ईश्वर से समस्वर हो जाता है। यह उच्चकोटि का प्राणायाम है। महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र’ में अष्टांगयोग का वर्णन किया है। इसके आठ अंगों में प्राणायाम एक अंग है।अष्टांग योग के अंग हैं, यम, नियम, आसन, प्राणायाम प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। प्राण-शक्ति पर नियंत्रण को प्राणायाम कहते हैं। यह कहा जाए कि विशेष रूप से सांस लेना-छोड़ना ही प्राणायाम है।

Recent Posts

%d bloggers like this: