November 28, 2020

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बीजेपी ने अतिरिक्त वोट हासिल कर शक्ति का कराया अहसास

भविष्य की राजनीति के लिए स्पष्ट संदेश दे गया चुनाव परिणाम

राँची:- झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए संपन्न चुनाव में परिणाम आशा के अनुकूल ही रहा, लेकिन चुनाव में जिस तरह से सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) में बीजेपी दरार लगाने में सफल रही, उससे राज्य में भविष्य की राजनीति के लिए एक स्पष्ट संदेश भी निकल कर आया है। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर का यह बयान काफी मायने रखता है कि इस चुनाव परिणाम के साथ ही हेमंत सोरेन सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है।

राज्यसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी दीपक प्रकाश को सबसे अधिक 31 मत प्राप्त हुए। जबकि संख्या बल के अनुसार भाजपा के 26 विधायकों के अलावा आजसू पार्टी के दो सदस्य तथा दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलने की उम्मीद थी। परंतु इन 30 सदस्यों के अलावा यूपीए फोल्डर में शामिल एक अन्य सदस्य का भी वोट बीजेपी को मिला। इस परिणाम से उत्साहित भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि राज्य में हेमंत सोरेन सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है और आने वाले समय में राज्य में सत्ता परिवर्त्तन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

कांग्रेस में भी नाराजगी के स्वर उभरने की आशंका

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट रहे, यहां तक कि जेवीएम से पार्टी में शामिल में हुए दो विधायकों प्रदीप यादव और बंधु तिर्की का भी वोट मिला। साथ ही भाकपा-माले के विनोद कुमार सिंह ने भी वायदे के मुताबिक अपनी पार्टी के चुनाव एजेंट को दिखाकर कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने का काम किया। पार्टी को उम्मीद थी कि राष्ट्रीय जनता दल, आरजेडी के सत्यानंद भोक्ता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कमलेश कुमार सिंह का भी वोट कांग्रेस प्रत्याशी शहजादा अनवर को मिलेगा, परंतु ऐसा नहीं हो सका। भाजपा द्वारा सबसे अधिक वोट हासिल करने को लेकर बनाये गये मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर जेएमएम की ओर से आरजेडी विधायक सत्यानंद भोक्ता से शिबू सोरेन को को वोट देने की अपील की गयी। उन्होंने इस आग्रह को स्वीकार भी कर लिया, यही कारण है कि जेएमएम के 29 विधायक रहने के बावजूद एक वोट अधिक मिला। कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना कि गठबंधन धर्म के तहत सरप्लस वोट को दूसरे प्रत्याशी के लिए ट्रांसफर करने की रणनीति बननी चाहिए थी, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक दल के नेता ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री से बातचीत करने के बाद कांग्रेस के आला नेताओं को पूरी जानकारी नहीं उपलब्ध करायी, जिस कारण परिणाम इतना अधिक निराशाजनक रहा।

सरप्लस वोट मिलने से भी चुनाव परिणाम पर नहीं पड़ता फर्क

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 18 वोट मिले। पार्टी को उम्मीद थी कि जेएमएम के दो सरप्लस वोट के अलावा आरजेडी व एनसीपी का एक-एक वोट मिलेगा, इससे पार्टी को मिलने वाले मतों की संख्या बढ़कर 22 हो सकती थी। वहीं यूपीए प्रत्याशी को अतिरिक्त वोट के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद आजसू पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो से बातचीत कर दो वोट जुगाड़ करने की कोशिश की। इसके अलावा निर्दलीय सरयू राय से भी संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गयी। परंतु आजसू पार्टी और निर्दलीय सरयू राय ने साफ तौर पर बीजेपी को वोट देने का ऐलान कर यूपीए के दूसरे प्रत्याशी की संभावना को क्षीण कर दिया। हालांकि सरयू राय ने दिखावे के तौर पर प्रथम वरीयता का मत बीजेपी और दूसरी वरीयता का मत जेएमएम को देने की बात कही, लेकिन दूसरी वरीयता के मत का कोई महत्व नहीं रह गया।

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