November 28, 2020

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आखिर सैंकड़ों टन गुटखा कहाँ गया आसमान खा गया या जमीन निगल गई

राँची:- आठ मई को झारखंड में जिस वक्त 11 नामी कंपनियों के पान मसाले की बिक्री पर से पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, उस वक्त गुटखा कारोबारियों के पास सैैंकड़ों टन गुटखे का स्टॉक था। सरकार के निर्देश के मुताबिक इस गुटखे के स्टॉक की जानकारी देकर इसे झारखंड से हटाने को कहा गया था। कारोबारियों को यह छूट दी गई थी कि वह चाहें तो अनुमति लेकर गुटखे को दूसरे किसी ऐसे राज्य में अपना स्टॉक भेज सकते हैैं, जहां गुटखा बेचना प्रतिबंधित न हो। बड़ी संख्या में कारोबारियों ने बिना आवेदन दिए और बिना यहां से गुटखा को हटाए सैैंकड़ो टन गुटखा को यहीं खपा दिया। जाहिर है गुटखे को चोरी-छिपे बाजार में ऊंचे दाम में बेचने का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

स्वास्थ सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने गुटखा के डिस्ट्रीब्यूटरों को अपने क्षेत्र के सभी दुकानदारों से 31 मई तक गुटखा को जमा करके एसडीओ को आवेदन देने व झारखंड के बाहर जिस राज्य में गुटखा प्रतिबंधित नहीं है, वहां बेचने के आदेश दिए थे। राजधानी रांची में 20 में से सिर्फ छह डिस्ट्रीब्यूटरों ने दूसरे राज्यों में स्टॉक भेजने के लिए अनुमति ली। बाकी ने आवेदन ही नहीं किया।

इसी तरह लोहरदगा कोडरमा, हजारीबाग समेत दर्जन भर जिलों में इस आशय का एक भी आवेदन एसडीओ के पास नहीं पहुंचा। अगर जिलों से मिली रिपोर्ट को सही मानें तो तंबाकू व गुटखे के स्टॉक के बारे में यह पता नहीं चल पा रहा है कि इसे आसमान खा गया या जमीन निकल गई। इसकी दूसरी तस्वीर यह है कि इन गुटखों को चोरी-छिपे शहरों व गांवों में भारी मात्रा में खपाया जा रहा है। दुकानदार ग्राहक के मांगने पर इसे ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।

प्रदेश में सैैंकड़ों करोड़ का गुटखे व तंबाकू का कारोबार है। राजधानी रांची में ही प्रत्येक माह 100 करोड़ रुपये से ऊपर का इसका कारोबार होता है। 31 मई तक तय की गई डेडलाइन में रांची में प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ दो करोड़ रुपये माल भेजे जाने की अनुमति ली गई है। शुरुआत में रोक लगाए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कुछ कार्रवाई भी हुई। 18 मई को रांची के अपर बाजार में एक डिस्ट्रीब्यूटर पर माल रखने का आरोप था। संबंधित मालिक पर एफआइआर भी दर्ज की गई है।

वहीं जिलों की बात करें तो लोहरदगा की एसडीओ ज्योति कुमारी झा का कहना है कि प्रतिबंध के बाद स्टॉक बाहर ले जाने को लेकर अब तक कोई आवेदन नहीं आया है। प्रशासन छापेमारी अभियान शुरू करेगा। खूंटी एसडीओ हेमंत सती और रामगढ़ एसडीओ कीॢत श्री ने भी बताया कि उन्हें स्टॉक बाहर ले जाने को कोई आवेदन नहीं मिला है। गुटखा की कालाबाजारी के संबंध में आधिकारिक शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

चतरा के एसडीओ राजीव कुमार ने बताया कि उनके यहां भी कोई आवेदन नहीं मिला है। सिमडेगा के एसडीओ कुंवर सिंह पाहन ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटरों का समय बीत गया है, कोई आवेदन नहीं दिया गया। चोरी -छुपे गुटखा बेचने वालों पर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोडरमा, हजारीबाग, गढ़वा व गुमला, लातेहार के अनुमंडल पदाधिकारी के अनुसार 31 मई तक की ही डेडलाइन थी। तब तक कोई आवेदन नहीं आया। अगर अब किसी के पास स्टॉक पाया गया तो ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों लगाई गई थी रोक

विभिन्न जिलों से रजनीगंधा, विमल, पान पराग सहति 11 ब्रांड के पान मसाला के संग्रहित 41 नमूनों की जांच में प्रतिबंधित मैग्नीशियम कार्बोनेट पाया गया। इससे हृदय की बीमारी सहित अनेक तरह की गंभीर बीमारियां होती हैं। इसके बाद एक साल का प्रतिबंध लगाया गया। ज्ञात हो कि झारखंड पान मसाले पर प्रतिबंध लगाने वाला देश का तीसरा राज्य है।

कौन-कौन से ब्रांड के पान मसाले पर लगा प्रतिबंध

रजनीगंधा, विमल, शिखर, पान पराग, दिलरुबा, राजनिवास, सोहरत, मुसाफिर, मधु, बहार, पान पराग प्रीमियम पर प्रतिबंध लगा है।

प्रदेश में साढ़े 34 फीसद लोग करते हैं सेवन

एक सर्वे में झारखंड में तंबाकू सेवन करने वाले लोगों का प्रतिशत 38.9 फीसद है। इसमें चबानेवाले तंबाकू सेवन करने वालों का प्रतिशत 34.5 फीसद है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा है।

अगर कहीं प्रतिबंधित पान मसाला या गुटखा चोरी-छिपे बेचा या खरीदा जा रहा है तो ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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