December 3, 2020

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केंद्र सरकार से निजी स्कूलों को सहायता उपलब्ध कराये : आलोक दुबे

राँची:- प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन झारखंड इकाई, के अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से निजी स्कूलों को सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी तथा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को भी काॅफी भेज कर आग्रह किया है कि उन्हें पत्र लिखने में महारत हासिल है, इसलिए झारखंड के निजी स्कूलों, वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं तथा अभिभावकों तथा शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मियों के हित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से मदद दिलाने में सहयोग करें।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कोरोना वायरस कोविड-19 से उत्पन्न वैश्विक महामारी से उत्पन्न संकट के कारण झारखंड के कई निजी विद्यालय बंदी के कगार पर आ गये है। इन विद्यालयों के सभी संचालक पिछले तीन-चार महीनों से आर्थिक और मानसिक संकट से घिरे हुए है। संचालकों को बार-बार यह डर सता रहा है कि अधिकतर निजी विद्यालय जो किराये के भवनों में संचालित हो रहे है, बंदी के कारण इन विद्यालयों का किराया और विद्युत बिल की राशि, बैंकों का कर्ज, वाहनों का टैक्स आदि की भरपाई कैसे और किस फंड से किया जाए, यह मुश्किल खड़ी हो गयी।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि दूसरी तरफ सरकार या प्रशासन निजी विद्यालयों के भवनों, फर्नीचर, शौचालय, चुनाव में मैदान की जरूरत , प्रतियोगी परीक्षाओं को संचालित करने या क्वारंटाइन सेंटर बनाने आदि की जरूरत पड़ने पर लेती है, इस परिस्थिति में भी निजी विद्यालय अपने यहां पठन-पाठन को स्थगित कर सरकार की भरपूर मदद करने में कोई चूक नहीं करते। निजी विद्यालयों का सारा दारोमदार विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के माता-पिता एवं अभिभावकों के द्वारा फीस की भुगतान पर ही निर्भरत करता है, लेकिन सबसेब ड़ी परेशानी का सबब यह है कि पिछले तीन-चार महीनों से अधिकतर विद्यार्थियों के अभिभावक निजी विद्यालयों को भी भुगतान नहीं कर रहे है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि
प्रधानमंत्री से प्रार्थना है कि शिक्षा दीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देश के सभी निजी आईआईटी को जिस तरह से केंद्रीय सहायता की मंजूरी प्रदान की है, वैसे ही भारत के सभी निजी विद्यालयों को इस आपदा की घड़ी में केंद्रीय सहायता देने पर विचार करें, जिससे भारत में लाखों की संख्या में संचालित निजी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों और इन स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों तथा उनके परिजनों का कल्याण हो सके।

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