November 28, 2020

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तकनीकी व वोकेशनल शिक्षा कतई व्यवहारिक नहीं- बाबूलाल मरांडी

फीस जमा करने में असमर्थ रहने पर गरीब बच्चों का दाखिला नहीं हो पाता, सीटें खाली रह जाती है

राँची:- भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि झारखंड में पॉलिटेक्निक, आईटीआई, नर्सिंग, पैरामेडिकल सहित अन्य तकनीकी एवं वोकेशनल शिक्षा की जो वर्तमान व्यवस्था है वह बच्चियों व बीपीएलधारी-गरीब छात्रों के लिए कतई व्यवहारिक नहीं है। जो व्यवस्था है, उसमें पहले तो फीस जमा करने में असमर्थता के कारण गरीब परिवारों के बच्चों का दाखिला ही नहीं हो पाता है, जिस कारण संस्थानों में अक्सर सीटें खाली रह जाती हैं। अगर येन-केन-प्रकारेण कहीं से पैसे जुगाड़ करने के बाद इनका दाखिला हो भी गया तो कोर्स पूरा करना इनके बूते में नहीं होता, जिस कारण बीच में ही इनकी पढ़ाई बाधित हो जाती है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब इसका समुचित लाभ ही संबंधित वर्ग को नहीं मिले, तब केवल नाम के लिए अनुदान होने-न-होने का कोई मतलब नहीं रह जाता है ? इसमें सुधार कर इसे व्यवहारिक और गरीब परिवारों के लिए लाभकारी बनाने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि अपने मुख्यमंत्रित्व काल में पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के कुछ संस्थान में यह प्रावधान किया था कि गरीब बच्चों की फीस (सेमेस्टर) का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। साथ ही छात्रवृति का भी प्रावधान किया था। प्रारंभिक कुछ वर्षो तक इसका लाभ गरीब परिवारों के बच्चों को मिला भी। बाद में क्या व्यवस्था बदली, क्यों समय अंतराल के साथ गरीब परिवारों के हित को लेकर इसमें आवश्यक सुधार नहीं हुआ आदि विषयों के चर्चा-परिचर्चा में मैं जाना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो प्रावधान है कि उसके अनुसार संस्थानों में पहले छात्रों से दाखिला शुल्क जमा करा लिए जाते हैं। तब बाद में उन्हें छात्रवृति के नाम पर कुछ राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है, जो अपर्याप्त होता है। अब जब गरीब परिवारों के पास सरकार द्वारा तय शुल्क जितनी बड़ी रकम होगी, तब न जाकर वे अपने बच्चों का इन संस्थानों में दाखिला करा पाएंगे।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उनका मानना है कि अगर सरकार वास्तव में बच्चियों एवं बीपीएलधारी छात्रों को सरकारी सहायता मुहैया कराना चाहती है तो क्यों नहीं उनकी पूरी फीस राज्य सरकार द्वारा संबंधित संस्थान को ही भुगतान कर दिया जाए। ऐसा करने से गरीब परिवारों को कोई तनाव भी नहीं रहेगा। जब पैसे की कमी के कारण वे दाखिला कराने में ही असमर्थ हो जाएंगे तब फिर बाद में सरकार द्वारा मिलने वाली छात्रवृति का क्या लाभ ? कोई भी रियायत तभी सार्थक होती है, जब उसका समुचित लाभ संबंधित लोगों को ससमय मिले। वहीं इन्हें मिलने वाली छात्रवृति भी नाकाफी है।

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