November 29, 2020

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निजी स्कूलों के कार्यालयों को खोलने की अनुमति दी जाए-एसोसिएशन

राँची:- प्राईवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के की झारखंड राज्य इकाई के चेयरमैन आलोक कुमार दूबे ने शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो को पत्र लिखकर निजी स्कूलों के कार्यालयों को खोलने की अनुमति देने की मांग की है।
एसोसिएशन के चेयरमैन आलोक कुमार दूबे ने कहा कि जिस तरह से राज्य सरकार ने लॉकडाउन के बीच सरकारी कार्यालय को खोलने की अनुमति प्रदान की है, उसी तरह से निजी स्कूलों में गैर शैक्षणिक कार्यां के लिए कार्यालय खोलने की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों का कार्यालय खुलने से शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों अपने गैर शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे, वहीं इससे अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच संवाद स्थापित होने से ऑनलाइन शैक्षणिक गतिविधियों को भी गति प्रदान किया जा सकेगा।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पिछली सरकार में हजारों सरकारी स्कूलों को बंद कर देने से निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है और इन बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच सांमजस्य स्थापित होना जरूरी है, तभी बच्चों के बेहतर कल को सुनिश्चित किया जा सकता है।

राँची:- प्राईवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के की झारखंड राज्य इकाई के चेयरमैन आलोक कुमार दूबे ने शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो को पत्र लिखकर निजी स्कूलों के कार्यालयों को खोलने की अनुमति देने की मांग की है।
एसोसिएशन के चेयरमैन आलोक कुमार दूबे ने कहा कि जिस तरह से राज्य सरकार ने लॉकडाउन के बीच सरकारी कार्यालय को खोलने की अनुमति प्रदान की है, उसी तरह से निजी स्कूलों में गैर शैक्षणिक कार्यां के लिए कार्यालय खोलने की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों का कार्यालय खुलने से शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों अपने गैर शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे, वहीं इससे अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच संवाद स्थापित होने से ऑनलाइन शैक्षणिक गतिविधियों को भी गति प्रदान किया जा सकेगा।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पिछली सरकार में हजारों सरकारी स्कूलों को बंद कर देने से निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है और इन बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच सांमजस्य स्थापित होना जरूरी है, तभी बच्चों के बेहतर कल को सुनिश्चित किया जा सकता है।

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