November 27, 2020

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पिता के कमाई का नही बचा कोई आधार शेष, छात्र छात्राएं कैसे भरे मकान मालिकों का पेट- जमाल गद्दी

राँची:- छात्र नेता और मारवाड़ी महाविद्यालय छात्र संघ केअध्यक्ष जमाल गद्दी ने कहा कि लॉकडाउन के बीच अपने नियोजन, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं आदि को लेकर संशय में पड़े छात्र छात्राएं अब अपने मकान मालिक एवं लॉज होस्टल मालिकों के निशाने पर है। प्रतिदिन छात्र छात्राओं पर दबाव बना कर रेंट वसूलने एवं मानसिक रूप से छात्र छात्राओं को परेशान करने की कोशिशें की जा रही है। सरकार ऐसे लाखों छात्र छात्राओं के समस्याओं के प्रति गंभीर नही दिख रही है। सरकार को बताना चाहिए कि जब लॉकडाउन में पिता के कमाई का नही बचा कोई आधार शेष, छात्र छात्राएं कैसे भरे मकान मालिकों का रेंट?
जमाल गद्दी ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि कोविड 19 जैसे महामारी को देखते हुए विद्यार्थी अपने घरों में है, उनके घर के आय का स्त्रोत बंद पड़ा हुआ है, दिनचर्या के संसाधन जुटाना मुश्किल हो रहा है अतः इस विषम परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को तीन महीने के रूम- लॉज- होस्टल का किराया माफ़ किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस लॉकडाउन में अपने घर से दूर रहने वाले छात्रों को खुद के लिए भोजन व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में वे अपना किराया कैसे दे ? राज्य सरकार एवं जिला प्रसाशन के अधिकारियों को इन छात्रों के बचाव में आगे आना चाहिए और उनके कमरे का किराया माफ करना चाहिए।
शहरों में छात्र छात्राओं के आवासीय व्यवस्था रूपी किराया पहले से ही उच्चतम स्तर की रही है। एक कमरे में 2 लोगों को रहने के लिए औसतन 4000 रुपये देने पड़ते है। भोजन के लिए भी औसतन 3000 पटरी माह खर्च करने पड़ते है। इस संकट में देश के स्टूडेंट्स इन खर्चों का वहन नहीं कर सकते। सरकार को इस पर विचार करते हुए पिछले 3 माह का रूम रेंट फ्री करना चाहिए।

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