December 1, 2020

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लॉकडाउन में कलाकारों, हस्तशिल्पियों व दस्तकारों का जीवन भी प्रभावित

दुमका:- लॉकडाउन‌ के कारण देशभर में सामान्य कारोबारी और सामुदायिक गतिविधि बंद होने का असर हमारे कलाकारों, हस्तशिल्पियों और दस्तकारों के जीवन पर भी पड़ा है। दुमका जिले के पारंपरिक जादोपटिया चित्रकला के कलाकार भी इससे अछूते नहीं हैं।
लॉकडाउन के कारण दुमका जिले के पारंपरिक ’जादोपटिया’ पट चित्रकला शैली के कलाकार पिछले दो माह से अपने घरों में ही रह कर पेंटिंग बना रहे हैं। वे न तो अपनी पेंटिंग लेकर गांव-गांव घूम‌ पा रहे हैं, न ही कोई उनकी पेंटिंग देखने उनके पास आ रहा है। लिहाजा उनकी आमदनी पूरी तरह बंद है और परिवार चलाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
दरअसल, ’जादोपटिया’ दुमका जिले में संताल समाज के बीच प्रचलित एक पारंपरिक लोकचित्र कला शैली है, जिसे ’जादो’ नामक एक विशेष जाति द्वारा वंश परंपरा से बनाती है। इन कलाकारों का यही एक मात्र पेशा है। ये लोग कागज के ५ से २० लंबे पट पर विभिन्न विषयों की पेंटिंग बनाते हैं और गांव-गांव में जाकर लोगों को उसे दिखाते हैं। साथ में गायन के माध्यम से पेंटिंग की कहानी लोगों को सुनाते हैं। बदले में लोग इन्हें अनाज और पैसे देते हैं, जिनसे इनकी जीविका चलती है।
लॉकडाउन में इनकी यह गतिविधि बंद है। वहीं सरकार से भी इन्हें कोई विशेष सहायता नहीं मिली है। जादोपटिया चित्रकला के कलाकारों को न केवल लॉकडाउन खत्म होने तक अपने कारोबार को बंद रखना पड़ेगा, बल्कि कोरोना संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही ये गांव-गांव और घर-घर जाकर अपनी पेंटिंग दिखा पायेंगे। ऐसे में सरकार से इन्हें मदद की बड़ी उम्मीद है।

दुमका:- लॉकडाउन‌ के कारण देशभर में सामान्य कारोबारी और सामुदायिक गतिविधि बंद होने का असर हमारे कलाकारों, हस्तशिल्पियों और दस्तकारों के जीवन पर भी पड़ा है। दुमका जिले के पारंपरिक जादोपटिया चित्रकला के कलाकार भी इससे अछूते नहीं हैं।
लॉकडाउन के कारण दुमका जिले के पारंपरिक ’जादोपटिया’ पट चित्रकला शैली के कलाकार पिछले दो माह से अपने घरों में ही रह कर पेंटिंग बना रहे हैं। वे न तो अपनी पेंटिंग लेकर गांव-गांव घूम‌ पा रहे हैं, न ही कोई उनकी पेंटिंग देखने उनके पास आ रहा है। लिहाजा उनकी आमदनी पूरी तरह बंद है और परिवार चलाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
दरअसल, ’जादोपटिया’ दुमका जिले में संताल समाज के बीच प्रचलित एक पारंपरिक लोकचित्र कला शैली है, जिसे ’जादो’ नामक एक विशेष जाति द्वारा वंश परंपरा से बनाती है। इन कलाकारों का यही एक मात्र पेशा है। ये लोग कागज के ५ से २० लंबे पट पर विभिन्न विषयों की पेंटिंग बनाते हैं और गांव-गांव में जाकर लोगों को उसे दिखाते हैं। साथ में गायन के माध्यम से पेंटिंग की कहानी लोगों को सुनाते हैं। बदले में लोग इन्हें अनाज और पैसे देते हैं, जिनसे इनकी जीविका चलती है।
लॉकडाउन में इनकी यह गतिविधि बंद है। वहीं सरकार से भी इन्हें कोई विशेष सहायता नहीं मिली है। जादोपटिया चित्रकला के कलाकारों को न केवल लॉकडाउन खत्म होने तक अपने कारोबार को बंद रखना पड़ेगा, बल्कि कोरोना संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही ये गांव-गांव और घर-घर जाकर अपनी पेंटिंग दिखा पायेंगे। ऐसे में सरकार से इन्हें मदद की बड़ी उम्मीद है।

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