November 25, 2020

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कोरोना वायरस व भाजपा के प्रपंच दोनों से करना पड़ रहा है मुकबला-कांग्रेस

राँची:- झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि राष्ट्रव्यापी पूर्णतः तालाबंदी के बीच देशवासियों को दो मोर्चे पर मुकाबला करना पड़ रहा है। एक ओर जहां वैश्विक कोरोना वायरस कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं के बड़बोलेपन, झूठ-प्रपंच और बिना तैयारियों के पूरे देश को लॉकडाउन लागू कर सभी को मुश्किल में धकेल देने से सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ने कहा कि झारखंड में भी पार्टी एक ओर जहां हर जरूरतमंद परिवारों भोजन-पानी और अनाज उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है, वहीं प्रदेश भाजपा के नेताओं के सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले वक्तव्य और राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे सहायता एवं राहत कार्य को लेकर चलाये अभियान को लेकर अनर्गल बयानबाजी से भी झारखंड की जनता त्रस्त है। उन्होंने कहा कि भाजपा के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बीच इन दिनों पत्र लिखने की प्रतिस्पर्द्धा चल रही है, भाजपा नेताओं को राज्य की जनता की चिंता नहीं है, देशभर के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी कामगारों, विद्यार्थियों और अन्य नागरिकों की घर वापसी एवं उनके रोजगार और अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाये जाने की चिंता नहीं है, बल्कि भाजपा नेता संकट की इस घड़ी में येन-केन-प्राकेरण मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए चिट्ठी-चिट्ठी का खेल खेल रहे है। भाजपा नेताओं को यदि राज्य की जनता की चिंता होती, वे प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर प्रवासी श्रमिकों के लिए स्पेशल ट्रेन, अनाज और रोजगार सृजन के लिए योजनाओं को शुरू करने में मदद की मांग करते थे।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा नेताओं के डीएनए में ही सामाजिक विद्वेष और लोगों को गुमराह करने तथा आम जनता को मुर्ख बनाने की भावना शामिल है, आज से ही नहीं, बल्कि देश की आजादी के पहले ही भाजपा नेताओं के संघी पूर्वज अपने निजी स्वार्थ के लिए अंग्रेजी शासन का गुणगान करते थे, बाद में अलग-अलग राजनीतिक पार्टी और संगठन बनाकर इनके द्वारा देश के लोगों को बरगलाने का काम किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को पद और सत्ता का इतना मोह है कि वैश्विक महामारी के दौरान भी उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिये जाने की चिंता सता रही है, जबकि भाजपा नेताओं के दबाव के कारण ही पिछले कार्यकाल के दौरान बाबूलाल मरांडी की पार्टी के ही छह विधायकों के दल-बदल के मामले को दबाये रखा गया था, वहीं अब भाजपा नेता विधानसभा अध्यक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की संवैधानिक मर्यादाओं का हनन कर रहे है।

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