December 1, 2020

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सखी मंडल की महिलाएं बनी कोरोना वारियर

राँची:- सखी मंडल की महिलाएं कोविड-19 के खिलाफ जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आवश्यकता की सामग्रियों के सप्लाई को निरंतर बनाएं रखने से लेकर राज्य के दूरस्थ इलाकों में लाचार एवं जरुरतमंद लोगों को दो वक्त का गर्म खाना उपलब्ध कराने तक में सखी मंडल अग्रणी भूमिका में है।
ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी संपोषित सखी मंडल की महिलाएं जरुरत के सामानों की कमी को दूर कार्यों में प्रशासन का साथ दे रही है। वहीं जिला प्रशासन के विभिन्न पहल को भी क्रियान्वित करने में ग्रामीण महिलाएं जी जान से जुटी है।

मुख्यमंत्री दीदी किचन के जरिए 1.2 करोड़ से ज्यादा थाली परोसी गई
सरायकेला के कुचाई के बीरगामडीह गांव की संतोरी बिरहोर पीवीटीजी समुदाय से हैं। बिरहोर समुदाय की यह महिला अपने पति के साथ रस्सी बनाकर नजदीकी बाजार में बेचकर अपनी आजीविका चलाती थी। कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन की वजह से इनके सामने वक्त के भोजन का संकट था। ऐसे मुश्किल में संतोरी को मिला मुख्यमंत्री दीदी किचन का साथ और दोनो वक्त के खाने की चिंता हो गई समाप्त। संतोरी बताती है कि मैं रोज यहां खाने आती हूं, सरकार के इस कदम से हमारी मुश्किल कम हुई है, सखी मंडल की दीदियां हमलोगों को बहुत प्यार से भरपेट भोजन कराती है।
संतोरी बिरहोर के जैसे लाखों लोगों के हौसलों को पंख दे रहा है मुख्यमंत्री दीदी किचन। मुश्किल हालात, आजीविका की दिक्कत एवं सम्पूर्ण लॉकडाउन के समय हर लाचार , जरुरतमंद एवं असहाय को सम्मान पूर्वक दो वक्त का भरपेट भोजन करा रही हैं सखी मंडल की दीदियां।
माननीय मुख्यमंत्री के निदेश पर राज्य भर में सखी मंडल की बहनों के जरिए शुरू की गई मुख्यमंत्री दीदी किचन के जरिए अब तक 1.2 करोड़ से ज्यादा गर्म भोजन की थाली परोसी जा चुकी है। राज्य के सभी पंचायतों में 6937 मुख्यमंत्री दीदी किचन संचालित किए जा रहे है जिसके जरिए रोजना 5 लाख से ज्यादा भोजन की थाली जरुरतमंदो को मिल रहा है। ग्रामीण झारखंड के लाचार, असहाय, अतिगरीब, मजदूर एवं उनके परिवार समेत हर जरुरतमंद को दो वक्त का खाना यहां परोसा जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री की अपील पर आजीविका मिशन के सखी मंडल की बहनों ने बिना किसी शुल्क के श्रमदान के जरिए इन दीदी किचन के संचालन की जिम्मेदारी ली है, जो वाकई काबिले- तारीफ है। 3 अप्रैल से शुरू किए गए मुख्यमंत्री दीदी किचन के संचालन में सखी मंडल की करीब 28000 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर रही है। सखी मंडल की महिलाएं लाचार एवं दिव्यांग लोगों को जो दीदी किचन तक चलकर नहीं आ सकते उनके घर तक खाना पहुंचाने का भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री दीदी किचन के संचालन में सोशल डिस्टेंसिंग, स्वच्छता एवं हैंडवाशिंग पर खास ध्याद दिया जा रहा है। कोविड-19 के खिलाफ जंग में सरकार के हर कदम पर पर साथ दे रही हैं कोरोना वॉरियर्स सखी मंडल की बहनें।


मास्क एवं सैनिटाइजर के उत्पादन में भी जुटी सखी मंडल
राज्य के करीब 297 सखी मंडल के 1000 से ज्यादा महिलाएं मास्क, सैनिटाइजर, पीपीसी कीट जैसे आवश्यक वस्तुओं के निर्माण में भी जुटी है। अब तक पूरे राज्य में 10 लाख से ज्यादा मास्क का निर्माण सखी मंडल की महिलाओं द्वारा किया जा चुका है। वहीं 4 लाख से ज्यादा बोतल सैनिटाइजर का उत्पादन एवं पैकेजिंग किया जा चुका है। सखी मंडल की महिलाओं ने इमरजेंसी सर्विस को सपोर्ट करते हुए करीब 3526 फेज वाइजर एवं 2582 पीपीसी कीट का उत्पादन किया जा चुका है।

लॉकडाउन में बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाती बैंकिग सखी
ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल से जुड़ी 1463 बैंकिंग सखी ग्रामीण इलाकों में बैंक से जुड़ी हर सेवा पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से लेकर पेंशन, नकद निकासी समेत तमाम लेन-देन की सुविधाएं लोगों को गांव एवं पंचायत के स्तर पर दे रही हैं। इन बैंकिंग सखियों ने अबतक 6 लाख से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सेवाएं दी है वहीं करीब 93 करोड़ का बैंकिंग लेन-देन इनके जरिए हुआ है।

कोरोना वारियर्स हैं सखी मंडल की महिलाएं
कोविड-19 के खिलाफ जंग में सखी मंडल की महिलाएं बखूबी अपनी पारिवारिक जिन्नेदारी के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी निर्वहन कर रही है। सखी मंडल की महिलाएं स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन की पहल पर भी कई सफल प्रयासों को अमली जामा पहना रही है। गुमला,खूंटी एवं कई अन्य जिलों में सखी मंडल की बहनें क्वारंटीन सेंटर्स में खाना बनाने की जिम्मेदारी संभाल रही है। वहीं साहेबगंज में जिला प्रशासन की पहल पर मुख्यमंत्री दीदी किचन के लिए पत्तल बनाने का काम जोरों पर है। कई जिलों में सखी मंडल की दीदियां कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए रैपिड रिस्पांस टीम की सदस्य के रुप में कार्य कर रही है।देवघर में जिला प्रशासन की पहल पर सखी मंडल चलंत दाल भात केंद्र का संचालन कर रही है। इन सब के अलावा हैंड ग्लब्स, एप्रन का निर्माण, गांव का सैनिटाइजेशन भी सखी मंडल की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है।

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