November 24, 2020

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प.बंगाल ने सीमा में प्रवेश की इजाजत नहीं दी, वापस क्वारंटाइन सेंटर लौटे प्रवासी श्रमिक

दुमका:- दुमका जिला प्रशासन द्वारा क्वारंटिन अवधि पूरी करने वाले‌ पश्चिम बंगाल के जिन लोगों को विशेष बसों की व्यवस्था कर वापस उनके घर भेजा गया था, लेकिन बंगाल प्रशासन ने उन्हें अपने राज्य की ‌सीमा में प्रवेश‌ की इजाजत नहीं दी। लिहाजा, ऐसे करीब 128 लोग दुमका के उन्हीं क्वारंटाइन सेंटरों में लौट आये हैं, जहां से उन्हें अपने राज्य और अपने घरों के लिए विदा किया गया था, जबकि बाकी जिन‌ लोगों के घर‌ दुमका‌ जिले‌ की सीमा से‌ नजदीक हैं वे साइकिल, पैदल और अन्य निजी उपाय कर गांवों के रास्ते बंगाल की सीमा में दाखिल हो गये।
जि‌न लोगों को बंगाल प्रशासन ने अपने राज्य की सीमा में‌ ‌दाखिल होने से रोक दिया, उनमें एक बारात पार्टी के २७ लोग भी हैं, जिन्हें ३४ दिन पहले गिरिडीह से कोलकाता लौटने के दौरान दुमका में क्वारंटिन किया गया था। यह परिवार भी वापस दुमका के उसी मूक-बधिर विद्यालय स्थित क्वारंटिन सेंटर में लौट आया, जहां वे अब तक घर वापसी के इंतजार में समय काट रहे थे। एक‌ माह से भी अधिक समय से दुमका में फंसे इन लोगों में बंगाल प्रशासन के इस रवैये के प्रति खासी नाराजगी है।

परिवार के मुखिया परवेज खान ने बताया कि दुमका जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पहले रानीश्वर के रास्ते बंगाल के सिउडी जिले की सीमा में उन्हें प्रवेश कराने का प्रयास किया। वहां असफल रहने के बाद शिकारीपाडा के रास्ते मुर्शिदाबाद जिले में प्रवेश कराने की कोशिश की गयी। पूरी रात इन कोशिशों में बीत गयी और अगले दिन सभी को वापस दुमका जिले के क्वारंटिन सेंटर लौटना पड़ा ।
परिवार के एक अन्य सदस्य आशिफ अली ने अपने ही राज्य‌ में वापसी नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह समझ पाना उनके लिए मुश्किल है कि जिस राज्य में वे पैदा हुए, जहां पले-बढे, वही इस संकट‌ के समय‌ उन्हें क्यों स्वीकार‌ नहीं कर रहा?
वहीं, दुमका की उपायुक्त राजेश्वरी बी ने कहा कि झारखंड सरकार के निर्देश पर इन लोगों को उनके घर भेजने की पहल की गयी थी। जल्द ही बंगाल प्रशासन से बात कर इसका हल निकाला जायेगा। ने दुमका जिले में क्वारंटिन किये गये पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश‌ के ५५० लोगों को मजिस्ट्रेट टीम‌ के‌ साथ विशेष व्यवस्था कर उन्हें अपने जिलों के‌ लिए विदा किया गया‌ था। इनमें लगभग २७५ लोग बंगाल के विभिन्न जिलों के थे।

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