November 23, 2020

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राज्यपाल द्वारा सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को मानदेय भुगतान का आदेश दिया

रांची : झारखंड में लॉकडाउन के दरम्यान का मानदेय राशि नहीं मिलने से अनुबंध सहायक प्राध्यापकों के बच्चे भुखमरी के कगार पर खड़े हैं. राज्य की राज्यपाल सह कुलाधिपति महोदया महामहिम द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्य के सभी सातों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर मानदेय भुगतान का आदेश दे चुकी हैं. इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं किया गया है और न ही इस संबंध में कोई सकारात्मक पहल ही की गयी है. ज्ञात हो कि झारखंड के सभी सातों विश्वविद्यालयों में घंटी आधारित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें प्रति घंटी के हिसाब से छ: सौ रुपये मानदेय राशि के रुप में भुगतान किया जाता है. परन्तु विश्वविद्यालय अथवा कालेजों में अधिकांश समय परीक्षा संचालित होने एवं अन्य कारणों से शिक्षण कार्य बाधित होने के कारण मानदेय में काफी असमानता है. इस असमानता को दूर कर एक निश्चित मानदेय देने की मांग संघ के द्वारा काफी समय से की जाती रही है. परन्तु तत्कालीन रघुवर सरकार के द्वारा इस दिशा में कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किया गया. अगर रघुवर सरकार के द्वारा इनका समायोजन अथवा मानदेय फिक्स कर दिया जाता तो शायद आज ये दिन नहीं देखने होतें. बता दें कि झारखंड में उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने में इन अनुबंध सहायक प्राध्यापकों की उल्लेखनीय भूमिका रही है. इनकी नियुक्ति यूजीसी की शर्तों के अनुसार हुई है. झारखंड सहायक प्राध्यापक अनुबंध संघ के प्रतिनिधि डॉ संतोष कुमार  और रांची विश्वविद्यालय अनुबंध सहायक प्राध्यापक संघ के  उपाध्याय डॉ रीझू  नायक ने कहा कि सरकार को हमारी समस्या को दूर करने के लिए यथाशीघ्र सकारात्मक कदम उठानी चाहिए, ताकि  अनुबंध सहायक प्राध्यापकों को आर्थिक कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़े. साथ ही वे भी समाज में एक सम्मानित जीवन जी सकें. लॉकडाउन के दौरान भी सभी विश्वविद्यालयों के अनुबंध सहायक प्राध्यापकों के द्वारा लगातार प्रति दिन ऑनलाइन क्लासेस लिए जा रहे हैं. बावजूद इनके मानदेय भुगतान के प्रति सरकार का रवैया उदासीन बनी हुई है. इस मामले में सरकार को गंभीरता पूर्वक इस मामले में संज्ञान लेते हुये त्वरित कार्यवाही का आदेश देना चाहिये.

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