September 20, 2020

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कोडरमा के शिव गुरु महोत्सव में उमड़ा जन सैलाब

कोडरमा :- इन्दरवा के पंचायत भवन मैदान में शिव गुरू महोत्सव आयोजन किया गया, जिसके मुल विषय में ‘‘जल और जंगल बचाओ, पेड़ लगाओ’’ विचार का केन्द्र बिन्दु रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरेण्य गुरूभ्राता श्री हरीन्द्रानन्द जी ने कहा कि पर्यावरण की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण और अन्य सभी प्रदूषण की मात्रा दिनो दिन बढ़ती जा रही है। कुएं और तालाब जल विहीन हो रहे हैं। नदियां भी अस्तित्व विहीन हो चुकी हैं। हवा विषाक्त हो रही है। ध्वनि प्रदूषण भी मानक से ऊपर है। हम पेड़-पौधों को लगातार काटते जा रहे हैं तथा धरती पर पेड़-पौधे एवं वन कम होते जा रहे हैं। इसका दुष्परिणाम हमारी अगली पीढ़ी को अवश्य ही झेलना पड़ेगा।हमारे गुरू शिव प्रकृति का अयण करते हैं। वे प्रकृति के पालक है, संरक्षक भी हैं। शिव के शिष्य अपने गुरू शिव की बनाई हुई दुनियां के साथ छेड़छाड़ नहीं करते वरन् उसकी सुरक्षा एवं संरक्षण में मनसा-वाचा-कर्मणा तत्पर रहते हैं।

शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार श्री अर्चित आनंद जी ने बताया कि पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित लगभग पचास से अधिक कार्यक्रम हमलोग कर चुके हैं एवं पिछले वर्ष तक हमलोगों ने लगभग 20 लाख पौधे पुरे देश एवं नेपाल के क्षेत्रों में लगाया है। उन्होंने बताया कि कितना दुखद है कि हम प्रौद्योगिकी के इतने आदी हो गए हैं कि हम अपने पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों की अनदेखी करते हैं। यदि हम वास्तव में जीवित रहना चाहते हैं तो अधिक से अधिक पेड़ लगाए।

विदित है कि शिव जगतगुरू हैं अतएव जगत का एक-एक व्यक्ति चाहे वह किसी धर्म, जाति, संप्रदाय, लिंग का हो शिव को अपना गुरू बना सकता है। शिव का शिष्य होने के लिए किसी पारम्परिक औपचारिकता अथवा दीक्षा की आवश्यकता नहीं है। केवल यह विचार की ‘‘शिव मेरे गुरू हैं’’ शिव की शिष्यता की स्वमेव शुरूआत करता है। इसी विचार का स्थायी होना हमको आपको शिव का शिष्य बनाता है।
शिव को अपना गुरू मानने की बात का प्रारंभ 1982 के उत्तरार्द्ध से बिहार के मधेपुरा जिला से हुआ और इसका शुभारंभ वरेण्य गुरूभ्राता श्री हरीन्द्रानन्द जी ने किया। श्री हरीन्द्रानन्द जी उन दिनों मधेपुरा जिले के उप-समाहर्त्ता के रूप में पदस्थापित थे। वर्ष 1990 से शिव का शिष्य बनने और बनाने की चर्चा धीरे-धीरे कमरे से बाहर प्रारंभ हुई, जो आज देश-विदेश में व्यापक होती चली जा रही है। नवम्बर 2008 में, बिहार सरकार के संयुक्त सचिव के पद से अवकाश प्राप्त करने के उपरान्त, श्री हरीन्द्रानन्द जी शिव एवं शिव की शिष्यता के प्रति जन-मानस को जागरूक करने की दिशा में पूर्ण-रूप से समर्पित हैं। शिव को अपना गुरू बनाने के लिए साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी द्वारा तीन सूत्र बताये गये हैं।
पहला सूत्र:- अपने गुरू शिव से मन ही मन यह कहें कि ‘‘हे शिव! आप मेरे गुरू हैं। आप मुझ पर दया कर दीजिए।’’
दूसरा सूत्र:- सबको सुनाना और समझाना है कि शिव गुरू हैं; ताकि दूसरे लोग भी शिव को अपना गुरू बनायें।
तीसरा सूत्र:- अपने गुरू शिव को मन ही मन प्रणाम करना है। इच्छा हो तो ‘‘नमः शिवाय’’ मंत्र से प्रणाम किया जा सकता है।
इस महोत्सव में कोडरमा एवं समीपवर्ती जिलों के शिव शिष्य/शिष्याएँ सम्मिलित हुईं। आगत लोगों की संख्या लगभग पचास हजार से ज्यादा थी

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