September 26, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

बिहार की वर्तमान स्थिति को दर्शाती यह मार्मिक कविता

घर के चारो तरफ है पानी भरा

एक दीवार है जो उसको कई दिनों से रोके खड़ा
पानी भी कोई साफ नहीं उसमें भी है बहुत कचड़ा पड़ा 


एक परिवार है घर के अंदर
जिन्हें बस पानी निकलने का इंतजार है
उनके साथ एक बालक भी है जिसकी उम्र केवल चार है


यही जगह  बची है जो अभी सुखे में है 

इसलिए हर कोने में सांप बिच्छू के होने के भी आसार है 
इस हालत में एक दुसरे से खतरे का अंदाज़ा दोनों को है
पर रहना पड़ेगा दोनो लाचार हैं


वो चार साल का बच्चा अपने पलंग पर चढ़ने की कोशिश कर ही रहा था कि
तभी धराम की आवाज आइ और दीवार गिर पड़ी
पानी सरसरा कर अंदर घुस गया
अब पलंग के नीचे तक था पानी भरा
पास उसके गर्दन भर पानी में जो था बालक खड़ा


मम्मी -2 चिल्ला रहा
खड़ा अपने आंसूओ को बहा रहा
माँ पानी में चभाक चभाक कर भागती आइ
अपने बच्चें को हटा लिया
अपने लाल को चुप कराया और अपने सीने से सटा लिया


दीवार गिरी देख कर बाप ने भी अपना माथा पीटा
पानी में चभर चभर कर के अपने पांव को अपने बच्चे की तरफ घसीटा 
दीवार जो गिरी पड़ी है उसे पिछले साल ही कर्ज ले बनबाया था
गंगा माँ रक्षा करेगी इसलिए पुजा भी करवाया था 


हुआ कुछ नहीं चारो तरफ बस दर्द की भरमार है
आप से भी क्या उम्मीद लगाना आप तो बुद्धिजीवी लोग हैं
आप तो यही कहेंगे डुबने दो “बिहार” है

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