October 28, 2020

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बिहार: फर्जी प्रमाणपत्र पर बहाल शिक्षकों पर गाज गिरनी तय

पटना:- फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्त शिक्षकों पर गाज गिरना लगभग तय है। पटना हाईकोर्ट ने सोमवार को फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्त शिक्षकों की पूरी जानकारी देने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। न्यायमूर्ति शिवजी पांडेय तथा न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने रणजीत पंडित की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और निगरानी को छह सप्ताह के भीतर यह बताने को कहा है कि फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्त शिक्षकों पर दर्ज प्राथमिकी पर क्या कार्रवाई की गई है। निगरानी को यह भी बताने के लिए कहा कि अभी तक ऐसे कितने शिक्षक पकड़े गए और उन पर किस तरह की कार्रवाई की गई है।

वहीं, आवेदक के वकील दीनू कुमार ने कोर्ट से निगरानी की जांच सीबीआई से करने की मांग की। उनका कहना था कि फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्त शिक्षकों को अब तक निगरानी बचा रही है, जबकि हाईकोर्ट ने जल्द जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था। तीन वर्ष बीतने के बावजूद जांच पूरी नहीं की जा सकी है। उन्होंने बताया कि निगरानी तथा विभाग की मिलीभगत से फर्जी शिक्षक अब भी गलत तरीके से वेतन एवं अन्य प्रकार की सुविधाएं ले रहे हैं। प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में वर्ष 2006 से 2015 के बीच करीब तीन लाख 62 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इनके प्रमाणपत्र को लेकर हाईकोर्ट में अर्जी दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र की जांच की जिम्मेदारी निगरानी को दी। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्र बहाल शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन वैसे शिक्षकों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया, जिन्होंने स्वत: नौकरी छोड़ दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब तीन हजार शिक्षकों ने स्वत: नौकरी छोड़ दी थी।

शिक्षकों की संख्या लाखों में : उन्होंने कोर्ट को बताया कि सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने पर बताया गया कि फर्जी शिक्षकों की संख्या लाखों में हैं। फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्त शिक्षकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस राशि की भी वसूली होनी चाहिए। साथ ही जिन जिन अधिकारियों के कार्यकाल में भुगतान किया गया है उन सभी पर भी कार्रवाई के साथ राशि की वसूली होनी चाहिए।

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