October 27, 2020

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झारखंड में भारी बारिश से उफनाईं नदियां, बाढ़ में फंसे 59 लोगों को NDRF ने बचाया; चक्रधरपुर में स्‍कूलें बंद

अब तक अच्छी बारिश को तरस रहे झारखंड में रविवार को जमकर बरसात हुई। प. सिंहभूम के चक्रधरपुर में बाढ़ से हालात पैदा हो गए हैं। फंसे 59 लोगों को एनडीआरएफ और सीआरपीएफ की टीम ने सुरक्षित निकाला है। यहां कोयल व कोयना नदी उफान पर है। रांची-चाईबासा एनएच पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। सिंहभूम में करोड़ों की लागत से बहा पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गया। पुल महज आठ साल पुराना था।रविवार को कोयलांचल व आसपास के जल ग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद दामोदर एवं सपही नदियां उफान पर है। दामोदर नदी में जलस्तर बढ़ जाने से कोयला ढुलाई के लिए बनाया गया

डायवर्सन वह गया है । वहीं, सफी नदी के छलका पुल के ऊपर से पानी बह रहा है । इससे अशोक परियोजना से आरसीएम साइडिंग तक की कोयला ढुलाई पूरी तरह ठप हो गया है।
चतरा में पिछले 18 घंटे से लगातार हो रही बरसात से दर्जनों कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नदियों में बाढ़ आने की वजह से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। साहिबगंज में गंगा खतरे के निशान के करीब आती जा रही है, प्रशासन अलर्ट है। रविवार को राज्य में रांची में सबसे ज्यादा 63.2 एमएम बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को भी कुछ इलाकों में मध्य और तेज दर्जे की बारिश हो सकती है। इस मानसून में यह पहली बार है जब इतनी अच्छी बारिश हुई है। झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल है जहां इस बार काफी कम बारिश हुई है। बारिश से नुकसान के बीच किसानों ने राहत की सांस ली है और खेती-बाड़ी में जुट गए हैं।

अब तक अच्छी बारिश को तरस रहे कोल्हान में शनिवार-रविवार को हुई बरसात के बाद चक्रधरपुर में बाढ़ से हालात हैं। यहां बाढ़ में फंसे 59 लोगों को एनडीआरएफ और सीआरपीएफ की टीम ने सुरक्षित निकाला। कोयल व कोयना नदी उफान पर है। दूसरी ओर सड़क जलमग्न हो जाने से रांची-चाईबासा एनएच पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। दूसरी ओर जमशेदपुर में भी कई इलाकों में भारी बरसात में पानी भर गया।
वहीं सोनुवा-गोईलकेरा मुख्य सड़क पर झाडग़ांव और चांदीपोस के बीच पुलिया पार करते समय देर शाम चांदीपोस गांव के राजू साहू (38) पानी में बह गया, जबकि चक्रधरपुर में एक व्यक्ति की करंट लगने से मौत हो गई। देर शाम पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त अरवा राजकमल ने सोमवार को चक्रधरपुर अनुमंडल क्षेत्र के सभी विद्यालयों में अवकाश की घोषणा की है। जमशेदपुर में रुक-रुक कर 156.2 मिलीमीटर बारिश हुई।
लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलजमाव हो गया है, वहीं स्वर्णरेखा व खरकई नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे, तो हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा होगी। शनिवार शाम साढ़े पांच बजे से रविवार शाम साढ़े पांच बजे तक शहर में 156.2 मिलीमीटर वर्षा का रिकार्ड दर्ज किया गया है। इसमें रविवार को सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक 10.2 मिलीमीटर वर्षा हुई।

सिमडेगा में गत 24 घंटे से हो रही भारी बारिश से बीरू-सिमडेगा पथ में पालामाड़ा नदी पर तीन करोड़ की लागत से बना पुल रविवार को ध्वस्त हो गया। बताया जा रहा है कि यह पुल 2010-11 में संवेदक राजेंद्र प्रसाद ने बनवाया था। वैसे पुल की गुणवत्ता पर उसी समय से सवाल उठ रहे थे। इस संबंध में विशेष प्रमंडल विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार रस्तोगी ने बताया कि पुल के गुणवत्ता के सवाल पर संवेदक को निर्देशित किया गया था। संवेदक की लापहरवाही के कारण ही उसकी सेक्यूरिटी मनी भी जब्त कर ली गई थी।

उन्होंने बताया कि अधीक्षण अभियंता भी 20 अगस्त को सिमडेगा आएंगे और वे इसका जायजा लेंगे। मामले की जांच शुरू हो गई है। इधर पुल टूट जाने के कारण तामड़ा व बीरू का सीधा संपर्क कट गया है। नगर परिषद उपाध्यक्ष ओमप्रकाश साहु ने ध्वस्त पुल का जायजा लेने के बाद कहा कि पुल निर्माण में गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

चतरा में पिछले 18 घंटों से करीब पचास मिलीमीटर बारिश हुई है। लगातार हो रही बारिश के कारण दर्जनों कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। खेत-क्यारी जलमग्न हो गए हैं। नदियों उफान पर हैं। नदियों में बाढ़ आने की वजह से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। झमाझम हो रही बारिश धान एवं मक्का की खेती के लिए काफी लाभकारी माना जा रहा है। जिले में 16 अगस्त तक मात्र 61 प्रतिशत ही धान का रोपा हुआ था। तेज बारिश के बाद रोपा कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

साहिबगंज जिले में गंगा नदी रविवार को सुबह खतरे के निशान से 1.72 मीटर नीचे बह रही थी। बक्सर, पटना, हाथीदह एवं मुंगेर, भागलपुर, कहलगांव में जलस्तर कुछ दिनों में बढ़ा है परंतु किसी भी स्थान पर खतरे के निशान को पार नहीं किया है। साहिबगंज में रविवार सुबह जलस्तर स्थिर था। गंगा नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से सतर्कता बरती जा रही है।

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