October 22, 2020

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मौसम की मार: आर्द्रा में भी बारिश नहीं, बिहार में सूखे का संकट गहराया

पटना:- राज्य में अब सूखे का संकट गहराने लगा है। बीज डालने का अंतिम नक्षत्र आर्द्रा शनिवार को बीत गया और मात्र 65 प्रतिशत खेतों में ही बीज डाला जा सका है। राज्य के उन 14 जिलों में तो स्थिति और गंभीर है जहां बीज डालने का काम आधा भी नहीं हुआ है। आधा दर्जन जिले तो ऐसे हैं, जहां 20 प्रतिशत भी यह काम नहीं हो पाया है। अब अगर आगे स्थिति ठीक भी हो गई तो उत्पादन 75 प्रतिशत ही होगा। वर्षा राज्य में अब तक 57 प्रतिशत कम हुई है।

अषाढ़ में खेतों में दरार देख किसानों के होठ सूखने लगे हैं। एक दर्जन जिले तो ऐसे हैं जहां 30 प्रतिशत भी वर्षा नहीं हुई है। लिहाजा जहां किसान बीज डाले भी लिये हैं, वहां उसे बचाना कठिन हो रहा है। कई जिलों में दोबारा डाला गया बिचड़ा भी सूख गया। यह देख किसानों की चिंता की लकीरें और गहरी होती जा रही हैं कि महाकवि घाघ और भड्डरी की खेती को लेकर कही गईं कहावतें भी गलत साबित होने लगी। किसानों की माने तो यह अकाल का संकेत है। भड्डरी ने कहा है कि ‘जेठ मास जो तपै निराशा। तो जानो वर्षा की आशा’। यानी जेठ में जितनी गर्मी पड़ेगी, आगे उतनी ही वर्षा होगी।

उधर, महाकवि घाघ का कहना है कि ‘चढ़ते बरसे अदरा, उतरते बरसे हस्त। कितनी राजा डंड ले, आनंद रहे गृहस्थ’। यानी आद्र्रा के पहले दिन और हथिया के अंतिम दिन अगर वर्षा हो गई तो उपज काफी होगी। दोनों ही स्थिति राज्य में इस वर्ष बनी। जेठ खूब तपा भी और आद्र्रा के पहले दिन वर्षा भी हुई, बावजूद खेत में नमी की इतनी कमी है कि किसान हल लगाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। पटना, भोजपुर, रोहतास, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, सारण, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, मुंगेर, शेखपुरा, लखीसराय और जमुई जिलों में वर्षा की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां तीस प्रतिशत भी वर्षा नहीं हुई है। नालंदा, बक्सर, गया, औरंगाबाद, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, मुंगेर, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, खगड़िया और बांका जिलों में धान का बिचड़ा आधा भी नहीं गिरा है।

जल संसाधन विभाग अब तक राज्य में कुल क्षमता के आधे क्षेत्र में ही सिंचाई की व्यवस्था कर सका है। विभाग की अधिसंख्य योजनाएं पुरानी सिंचाई क्षमता को फिर से बहाल करने के लिए ही बनती हैं। नई योजनाओं पर काम शुरू भी होता है तो इतनी बाधाएं आती हैं कि उनके पूरा होने में काफी समय लग जाता है। राज्य में अधिकतम 53.53 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन आजादी के बाद से सरकारें इस लक्ष्य का आधा ही पहुंच पाई हैं। मार्च 2019 तक राज्य के जल संसाधन विभाग की सिंचाई क्षमता 30.04 लाख हेक्टेयर ही पहुंच पाई थी।

राज्य में सिंचाई की छोटी योजनाएं ही ज्यादा करगर हैं। इन योजनाओं का नियंत्रण लघु जल संसाधन विभाग करता है। इन छोटी योजनाओं में भी किसानों के नियंत्रण वाली योजनाएं ज्यादा सफल होती हैं, वरना सरकार के भरोसे रहे लोगों हर साल परेशानी झेलनी पड़ती है। हालांकि सरकार की डीजल अनुदान योजना उन्हें राहत देती है। राज्य में छोटी योजनाओं के सहारे सिंचाई की अधिकतम सीमा 64 लाख हेक्टेयर की है, लेकिन अभी आधी क्षमता के उपयोग पर ही सरकार काम कर रही है। यानी लगभग 32 लाख हेक्टेयर में सिंचाई करने की क्षमता इन छोटी योजनाओं के पास है।

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