October 24, 2020

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खूंटी के कोचांग में पत्थलगड़ी के अगुआ रहे ग्राम प्रधान सुखराम की गोली मारकर हत्या

रांची:- खूंटी के कोचांग में पत्थलगड़ी के नाम पर लोगों की भावनाएं भड़काकर पुलिस-प्रशासन-सरकार और कानून को चुनौती देने वाले देशद्रोहियों में से एक सुखराम मुंडा की शनिवार देर रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। कोचांग का ग्राम प्रधान सुखराम मुंडा पत्थलगड़ी मामले में नामजद था और पुलिस व सरकार के सख्त रुख के बाद भूमिगत हो गया था। सुखराम पर अड़की थाने में पत्थलगड़ी से संबंधित छह मामले दर्ज हैं। अड़की के अलावा वह अड़की के कोचांग, कुरुंगा आदि क्षेत्रों में सरकार-प्रशासन के विरुद्ध ग्रामीणों को भड़काने में सक्रिय था। एक साल पहले खूंटी के पत्थलगड़ी क्षेत्र में पुलिस अफसरों-पुलिसकर्मियों को बंधक बनाने में भी उसकी भूमिका रही है।

खूंटी के एसपी आलोक ने सुखराम की हत्या की पुष्टि की है। सुखराम को गोली किसने मारी, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। खूंटी पुलिस को अब तक जो सूचना मिली है, उसके अनुसार दो-तीन बाइक पर सवार अज्ञात आधा दर्जन अपराधी गांव पहुंचे और गांव के चौक के पास ही ग्राम प्रधान को गोली मार दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को उठाया और कोचांग स्थित पुलिस पिकेट में ले गई। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। रविवार सुबह सदर अस्पताल में सुखराम मुंडा का शव का पोस्‍टमार्टम कराने पुलिस पहुंची। पोस्टमार्टम के बाद उसका शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि पुलिस मुखबिरी के कारण सुखराम मुंडा की हत्या की गई है।

ग्रामीणों को प्रशासन के खिलाफ भड़काया था सुखराम ने
अड़की के कोचांग व कुरूंगा क्षेत्र में सुखराम मुंडा सक्रिय था। यह क्षेत्र जून 2018 तक पूरी तरह पत्थलगड़ी क्षेत्र था। यहां पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों, बाहरी तत्वों के गांव में प्रवेश पर पाबंदी थी। इसके लिए ग्राम प्रधान से अनुमति की बाध्यता थी। सुखराम मुंडा कोचांग का ग्राम प्रधान था, इसलिए उसने वहां के ग्रामीणों को प्रशासन के खिलाफ भड़काया था। अड़की के कुरुंगा गांव में पहुंची पुलिस को बंधक बनाने में भी सुखराम को पुलिस ने आरोपित किया था।

कोचांग गांव गत वर्ष सामूहिक दुष्कर्म की एक घटना के बाद ही चर्चा में आया था। हालांकि इस घटना में ग्राम प्रधान की भूमिका सामने नहीं आई थी। यह घटना पत्थलगड़ी को लेकर पुलिस-प्रशासन और पत्थलगड़ी के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान ही हुई थी। घटनाकक्म के अनुसार 19 जून, 2018 को कोचांग गांव स्थित मिशनरी स्कूल में मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक किया जा रहा था। नाटक दल में कुल 11 सदस्य थे। इनमें पांच महिलाएं, तीन लड़के, एक चालक व आशा किरण संस्था की दो सिस्टर थीं।

ईसाई मिशनरी के फादर अल्फोंस समेत जॉन जुनास तिड़ू, बलराम समद, जुनास मुंडा, अनूप सांडी पूर्ति, बाजिद समद उर्फ टकला ने षड्यंत्र कर नुक्कड़ नाटक मंडली की पांच महिलाओं-युवतियों का अपहरण कर लिया। इसके बाद छोटाउली जंगल में पांचों महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस घटना को लेकर पूरे प्रदेश में बवाल हुआ और एक्शन में आई सरकार ने खूंटी से पत्थलगड़ी समर्थकों को खदेड़ दिया था। एक साल बाद अब खूंटी, चाईबासा व अन्य इलाकों में उनके फिर से सर उठाने की बात सामने आ रही है।

सुखराम मुंडा की हत्या पत्लथलगड़ी समर्थकों या उग्रवादियों द्वारा किए जाने की भी चर्चा हो रही है। सूत्रों के अनुसार सुखराम मुंडा ने हाल के दिनों में पुलिस की मदद की थी और कोचांग में पुलिस पिकेट बनाने में परोक्ष रूप से पुलिस का सहयोग किया था। यह बात पत्थलगड़ी समर्थकों व उग्रवादियों को रास नहीं आ रही थी। सुखराम को लगातार धमकी भी मिल रही थी। हालांकि पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है।

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