October 31, 2020

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डॉक्टरों की हड़ताल से ओपीडी सेवा ठप

किशनगंज : – पिछले दिनों कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर परिवाहा मुखोपाध्याय पर हुए हमले से सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि देश भर के डॉक्टरों में आक्रोश व्याप्त है। डॉ. मुखोपाध्याय जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं।

पिछले दिनों कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर परिवाहा मुखोपाध्याय पर हुए हमले से सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि देश भर के डॉक्टरों में आक्रोश व्याप्त है। डॉ. मुखोपाध्याय जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं।

इसके बाद भी बंगाल सरकार द्वारा अब तक डाक्टरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस घटना के विरोध में आईएमए नई दिल्ली के आह्वान पर सोमवार को जिले के डॉक्टरों ने 24 घंटे के ओपीडी हड़ताल पर चले गये।

इस दौरान शहर के सभी नीजि क्लिनिक व निजी अस्पताल भी बंद रहे। सदर अस्पताल में भी ओपीडी सेवा बाधित रही। हालांकि इस बीच एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा चालू रखी गई थी। हालांकि इमरजेंसी सेवा चालू रहने से मरीजों को थोड़ी राहत मिली। बताते चलें कि मरीजों को डाक्टरों की हड़ताल की सूचना पहल मिल गई थी जिस वजह से कुछ मरीज ही इलाज कराने पहुंचे थे जिन्हें बैरंग लौटना पड़ा। सोमवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मुख्यद्वार पर डॉक्टरों ने धरना भी दिया और बंगाल सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

धरना का नेतृत्व माता गुजरी यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. इच्छित भारत कर रहे थे। डॉ. भारत ने कहा कि बंगाल की सीएम ममता बनर्जी डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है और बंगाल में आये दिन डाक्टरों पर हमला हो रहा है। जब डॉक्टरों की जान सुरक्षित नहीं रहेगा तो डॉक्टर दूसरे की जान कैसे सुरक्षित करेंगे।

डर के माहौल में काम करना डॉक्टरों के लिए असंभव होता जा रहा है। डॉ. भारत ने इस घटना को राजनीति रंग देने वाले का विरोध किया और कहा कि डॉक्टर का एक ही धर्म होता है वह मानव सेवा है। डॉ. भारत ने कहा कि जिस तरह से बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डॉक्टरों के खिलाफ बयानबाजी कर रही है इससे स्पष्ट है कि वे डॉक्टर की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। डॉक्टरों को जिस तरह से बंगाल में डराया व धमकाया जा रहा है इससे प्रतीत होता है कि वहां काम करने वाले डॉक्टर को आंदोलन एवं अपनी सेवाएं बंद रखने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

वहीं आईएम किशनगंज के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने कहा कि आईएमए इमरजेंसी मरीजों की पूरी चिंता कर रही है एवं उनके इलाज के लिए व्यवस्था भी कर रखी है।

उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए एवं डॉक्टरों को विश्वास में लेना चाहिए ताकि डॉक्टरों में डर का माहौल ना रहे डॉक्टर भयमुक्त माहौल में सेवा दे सकें। आईएमए के सचिव डॉ. मनीष कुमार, संयुक्त सचिव डॉ. सचिन प्रसाद, वरिष्ठ डॉ. शिव कुमार ने भी डॉक्टरों पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए डॉक्टरों को सुरक्षा देने की मांग की है। विरोध प्रदर्शन में डॉ. इच्छित भारत के अलावे डॉ. शिव कुमार, डॉ. सुब्रत प्रसाद, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. प्रणय कुणाल, डॉ. रिजवाउल करीम, डॉ. जयदेव मुखर्जी, डॉ. सुमित शर्मा, डॉ. राघवेन्द्र सिंह, डॉ. सचिन प्रसाद, डॉ. अतुल कुमार, डॉ. मधुकर प्रसाद, डॉ. देवलिना भुनिया, डॉ. पायल आनंद, डॉ. हरप्रित कौर सहित सैकड़ों डॉक्टर शामिल थे।

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