October 25, 2020

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बिहार में इंसेफेलाइटिस का कहर: NHRC ने केंद्र व राज्‍य से मांगी रिपोर्ट, CM नीतीश ने निजी अस्‍पतालों में भी फ्री किया इलाज

पटना:- यूं तो बिहार में एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) या इंसेफेलौपैथी गर्मी के मौसम की सालाना त्रासदी है, लेकिन इस साल तो हद हो गई। सिस्टम की नाकामी ने मौत के आंकड़ों को ऑल टाइम हाई (128) तो कर ही दिया है। महामारी के ऐसे भयावह माहौल में सोमवार को डॉक्‍टर भी हड़ताल पर चले गए। बिहार में एईएस के कहर को देखते हुए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुंमार ने निजी अस्‍पतालों में भी इलाज को फ्री कर दिया है। केंद्र सरकार ने भी सभी जरूरी मदद कर पेशकश की है। उधर, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है तो मुजफ्फरपुर में केंद्र व राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रियों पर लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।
बिहार में एईएस से अभी तक 128 बच्चों की मौत हो चुकी है। अकेले मुजफ्फरपुर में ही मौत का आंकड़ा सौ पार कर गया है। समस्तीपुर, मोतिहारी, नवादा व पटना में भी बच्चों की मौत बताती है कि बीमारी का फैलाव कितनी दूर तक हो चुका है। आंकड़ों की बात करें तो इसके पहले सर्वाधिक 120 मौतें साल 2012 में हुईं थीं। इस साल मौत का यह रिकार्ड टूट गया है।
हालांकि, राज्‍य सरकार के अनुसार अभी तक मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्‍ण मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल (एसकेएमसीएच) में 85 तथा केजरीवाल अस्‍पताल में 18 बचचों की मौत हुई है। राज्‍य सरकार के अनुसार इस साल एईएस से अभी तक 103 मौतें हुईं हैं।
इस भयावह हालात को देखते हुए राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र व राज्‍य सरकारों से जवाब-तलब किया है। एनएचआरसी ने मौत के आंकड़ों, बीमारी से बचाव व इसके इलाज की तैयारियों को लेकर चार सप्‍ताह में जवाब मांगा है।
एईएस की भयावह स्थिति को देखते हुए सोमवार कर देर शाम पटना में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार तथा दिल्‍ली में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हाई लेवल बैठकें की।
पटना में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की अध्‍यक्षता में हाई लेवल बैठक हुई। इसमें स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री व आपदा प्रबंधन मंत्री सहित आला अधिकारी शामिल रहे। बैठक में बीमारी की स्थिति की समीक्षा की गई तथा कई महत्‍वपूर्ण फैसले लिए गए।
मुख्‍यमंत्री की हाई लेवल बैठक में यह फैसला किया गया कि एईएस के मरीज को अस्‍पताला लाने के लिए सरकारी एंबुलेंस तो फ्री हैं ही, निजी एंबुलेंस या वाहन के भाड़ा को भी सरकार वहन करेगी। निजी अस्‍पतालों में भी इलाज सरकारी खर्चे पर होगा।
उधर, केंद्र सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुजफ्फरपुर में एईएस की जानकारी लेने के बाद केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एईएस को लेकर हाई लेवल बैठक की। बैठक के बाद केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि उन्‍होंने केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के साथ रविवार को इस बीमारी की स्थिति का जायजा लिया था। इस बीमारी के कारण अज्ञात हैं। इस बीमारी को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र व राज्‍य सरकारें इस बीमारी को लेकर गंभीर हैं। राज्‍य को केंद्र सरकार सभी जरूरी मदद दे रही है।
यूं तो बिहार में एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) या इंसेफेलौपैथी गर्मी के मौसम की सालाना त्रासदी है, लेकिन इस साल तो हद हो गई। सिस्टम की नाकामी ने मौत के आंकड़ों को ऑल टाइम हाई (128) तो कर ही दिया है। महामारी के ऐसे भयावह माहौल में सोमवार को डॉक्‍टर भी हड़ताल पर चले गए। बिहार में एईएस के कहर को देखते हुए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुंमार ने निजी अस्‍पतालों में भी इलाज को फ्री कर दिया है। केंद्र सरकार ने भी सभी जरूरी मदद कर पेशकश की है। उधर, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है तो मुजफ्फरपुर में केंद्र व राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रियों पर लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस बीच बिहार में एईएस से बच्‍चों की लगातार हो रही मौतें व बीमारी के इलाज में लापरवाही के आरोप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन तथा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ मुजफ्फरपुर कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। परिवाद सोमवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ( सीजेएम) सूर्यकांत तिवारी के कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने दाखिल किया है। कोर्ट ने इसपर सुनवाई के लिए 24 जून की तारीख मुकर्रर की है।
अपने परिवाद पत्र में तमन्‍ना हाशमी ने आरोप लगाया है कि उक्‍त मंत्रियों ने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया। जागरूकता अभियान नहीं चलाने के कारण बच्चों की मौतें हो गईं। आरोप के अनुसार बीमारी को लेकर आज तक कोई शोध भी नहीं किया गया। लापरवाही के कारण बच्चों की मौत हुई है।

इसके पहले पूर्व मंत्री व वरीय बीजेपी नेता डॉ. सीपी ठाकुर ने भी राज्‍य की नीतीश सरकार पर लापरवाही का बड़ा आरोप लगा दिया। उन्‍होंने कहा कि बीमारी को लेकर सरकार देर से जागी। सरकार ने बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया। सीपी ठाकुर ने कहा कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को खुद मुजफ्फरपुर जाकर देखना चाहिए था।

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